अजमेर के जेएलएन अस्पताल में डॉक्टरों ने रोबोटिक सर्जरी से किडनी में कैंसर की 9 सेंटीमीटर की गांठ निकाली। डॉक्टरों ने रोबोटिक तकनीक की मदद से करीब 8 घंटे तक ऑपरेशन किया। जटिल सर्जरी के महज 12 घंटे बाद ही 56 साल का मरीज अपने पैरों पर चलने लगा। ऑपरेशन की चुनौती यह थी कि किडनी में खून पहुंचाने वाली सामान्य नसों की जगह 3 असामान्य और घुमावदार नसें थीं। ऐसे में जरा सी चूक भारी पड़ सकती थी। पिछले कुछ समय से मरीज के पेशाब में खून आ रहा था, लेकिन मरीज पथरी समझकर नजरअंदाज करता रहा। जब जांच कराई तो बाईं किडनी में 7×9 सेमी का कैंसर ट्यूमर निकला। नागौर के परबतसर निवासी मरीज की इस सर्जरी की जानकारी अस्पताल प्रशासन ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। पथरी समझकर टालते रहे, जांच में निकला कैंसर का ट्यूमर दरअसल, मरीज लंबे समय से पेशाब में खून आने और तेज दर्द की समस्या से जूझ रहा था। पहले से पथरी की शिकायत होने के कारण वह इसे उसी का असर मान रहा था। जब खून आने की समस्या बढ़ी तो रिश्तेदार की सलाह पर जेएलएन अस्पताल के सर्जरी विभाग के यूनिट हेड एवं प्रोफेसर डॉ. अनिल के. शर्मा से संपर्क किया। अस्पताल में सोनोग्राफी और सीटी स्कैन कराने पर बाईं किडनी में 7×9 सेंटीमीटर का ट्यूमर मिला। तीन असामान्य नसों के बीच ऑपरेशन, ब्लीडिंग का था खतरा डॉक्टरों अनिल के शर्मा के मुताबिक, इस केस में सबसे बड़ी चुनौती किडनी की असामान्य ब्लड सप्लाई थी। सामान्य तौर पर किडनी में एक या दो प्रमुख रक्त वाहिकाएं होती हैं, लेकिन मरीज की किडनी में तीन नसें असामान्य और घुमावदार रास्तों से गुजर रही थीं। ऑपरेशन के दौरान किसी नस को नुकसान पहुंचने पर गंभीर रक्तस्राव का खतरा था। इस जटिलता को देखते हुए डॉक्टरों ने ओपन सर्जरी के बजाय रोबोटिक सर्जरी का विकल्प चुना। आठ घंटे की सर्जरी, छोटे चीरे से निकाला ट्यूमर करीब 8 घंटे तक चली सर्जरी में डॉक्टरों ने रोबोटिक तकनीक की मदद से सावधानीपूर्वक ट्यूमर निकाला। ओपन सर्जरी में बड़ा चीरा लगाना पड़ सकता है, जबकि रोबोटिक सर्जरी में छोटे चीरे के जरिए ऑपरेशन किया गया। इससे मरीज को जल्द रिकवरी में मदद मिली। ऑपरेशन के करीब 12 घंटे बाद मरीज चलने-फिरने लगा और अगले दिन से उसे सामान्य डाइट दी गई। डॉक्टर बोले- टीमवर्क और तकनीक से मिली सफलता