अलवर के सरिस्का में आने वाले टूरिस्ट 1 अक्टूबर से टाइगर देख सकेंगे। गुरुवार से सुबह-शाम की सफारी शुरू हो जाएगी। सरिस्का के जंगल में अब 56 टाइगर हैं। जिसमें 11 टाइगर, 18 टाइग्रेस, 27 शावक हैं। पहले ही दिन सरिस्का में 600 से अधिक टूरिस्ट के आने की तैयारी है। सरिस्का के मुख्य गेट पर टूरिस्ट का स्वागत कर उनको जंगल में सफारी के लिए भेजा जाएगा। बारिश के कारण मानसून सीजन में टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट सरिस्का में 1 जुलाई से सफारी बंद हो जाती है। बारिश के तीन महीनों में सरिस्का में टूरिस्ट का आना और टाइगर का दिखना भी न के बराबर रहता है। लेकिन अब एक अक्टूबर से वापस सरिस्का के जंगल में टाइगर की साइटिंग होगी। सरिस्का में कुल 35 केंटरा व जिप्सी हैं। जिनके जरिए टूरिस्ट को सफारी कराई जाती है। जिप्सी का 8 हजार रुपए किराया है। जिसमें एक साथ 6 सदस्य सफारी कर सकते हैं। वहीं केंटरा में 20 टूरिस्ट जा सकते हैं। 35 में से 28 व्हीकल की ऑनलाइन बुकिंग होती है। एसीएफ अंकुश ने बताया कि 1 अक्टूबर से सफारी शुरू हो जाएगी। जिसके लिए ऑनलाइन बुकिंग काफी हो चुकी है। सभी रूट पर सफारी होगी। बारिश के कारण खराब हुए ट्रैक को दुरुस्त किया गया है। मंगलवार व शनिवार पांडुपोल जाने का अवसर मानसून सीजन में सरिस्का बंद रहने के दौरान विजिटर्स और श्रद्धालु टहला व सदर गेट से पांडुपोल हनुमान मंदिर में मंगलवार व शनिवार को आते-जाते रहे हैं। सप्ताह में केवल दो दिन एक ही रूट पर टूरिस्ट को पांडूपोल हनुमान मंदिर आने की अनुमति रहती है। बाकी सफारी के रूट बंद कर दिए जाते हैं। बफर जोन में भी टाइगर खूब अलवर शहर से सटे सरिस्का के बफर जोन के जंगल में एक साथ 5 टाइगर दिखते रहे हैं। भूरासिद्ध मंदिर के पास पहाड़ी के पीछे बाघिन एसटी-19 अपने 4 शावकों कई बार दिखी है। इसके अलावा पूरे जोन में 10 टाइगर हैं। बफर जोन अलवर के बारा लिवारी ट्रैक पर एक साथ 5 टाइगर देखे जा चुके हैं। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट चिन्मय मैकमेसी व फोटोग्राफर हिमांशु शर्मा ने बताया कि सरिस्का का जंगल खूबसूरत है। यहां टाइगर भी खूब हैं। अब आने वाले टूरिस्ट के लिए जंगल में बहुत कुछ देखने को मिलता है।