राजस्थान क्रिकेट संघ के चुनाव को लेकर गहमागहमी तेज हो गई है। बुधवार से नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई, जो शुक्रवार तक चलेगी। विसंगति देखिए- नेता, नेता पुत्र, विधायक, सांसद और पूर्व मंत्री वोट के अधिकार के बिना भी चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन राजस्थान के पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर वोट दे सकते हैं, लेकिन चुनाव नहीं लड़ सकते। राजस्थान के पूर्व क्रिकेटर गगन खोड़ा और पंकज सिंह के पास वोटिंग राइट है। खोड़ा के पास राजस्थान का डोमिसाइल भी है। बीसीसीआई के सीनियर सिलेक्टर भी रह चुके हैं। ऐसे में सवाल है कि आरसीए की कमान किसी क्रिकेटर को क्यों नहीं दी जा सकती? बीसीसीआई में हर वोटर को चुनाव लड़ने का अधिकार होता है। बीसीसीआई में इसका उदाहरण भी है। मिथुन मनहास जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व करते हुए बीसीसीआई अध्यक्ष बने। वे जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ में किसी पद पर नहीं थे, बल्कि बीसीसीआई की ओर से क्रिकेट संचालन के लिए गठित कमेटी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इसके बावजूद उन्हें एजीएम में हिस्सा लेने और चुनाव लड़ने का अधिकार मिला। पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर सौरव गांगुली बंगाल, वेंकटेश प्रसाद तमिलनाडु और मो. अजहरुद्दीन हैदराबाद का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। ऐसे में राजस्थान में भी पूर्व क्रिकेटरों को आरसीए की जिम्मेदारी देने की मांग उठ रही है। 20 से ज्यादा सचिवों की बाड़ेबंदी की चर्चा आरसीए चुनाव से पहले जिला क्रिकेट संघों के सचिवों की बाड़ेबंदी की चर्चाएं भी तेज हैं। अध्यक्ष पद के एक प्रमुख दावेदार ने 20 से ज्यादा जिला संघ सचिवों को दिल्ली रोड स्थित एक होटल में ठहराया है। इससे जुड़ी कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रही हैं। हालांकि चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ समीकरण बदल सकते हैं। यदि आरसीए पदाधिकारियों के नाम आलाकमान स्तर पर ही तय हो जाते हैं तो वास्तविक मुकाबला होगा या सर्वसम्मति बनेगी, इस पर भी नजर रहेगी। एक गुट का दावा है कि आलाकमान की सूची में नाम नहीं आया तो भी वह चुनाव मैदान में उतरेगा। इस गुट के पास 20 से ज्यादा सचिवों का समर्थन होने का दावा किया जा रहा है।