सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जमानत और आपराधिक मामलों में अदालतें अपनी निजी नैतिक सोच के आधार पर फैसला नहीं कर सकतीं। फैसला कानून और मामले के तथ्यों के आधार पर होना चाहिए। जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एएस चंद्रकुर की बेंच ने 23 सितंबर को दिए आदेश में यह बात कही। कोर्ट ने यौन शोषण के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का जमानत खारिज करने वाला फैसला रद्द कर दिया। कोर्ट ने आरोपी को जमानत दी कोर्ट ने कहा कि आरोपी एक साल से ज्यादा समय से जेल में है और केस की सुनवाई पूरी होने में अभी समय लग सकता है। इन बातों को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी। हाईकोर्ट 20 मार्च को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि आरोपी की रिहाई से सामाजिक व्यवस्था और पीड़ित के परिवार की नैतिकता पर असर पड़ सकता है। आरोपी पर यौन शोषण का आरोप रतलाम में कन्हा उर्फ कन्हैया सिंह नाम के व्यक्ति के खिलाफ POCSO, BNS और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। आरोपी शादीशुदा है। वह पीड़ित परिवार के पड़ोस में किराएदार के रूप में रहता था। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पहले पीड़ित नाबालिग लड़की की बड़ी बहन को भगाने की कोशिश की थी। इसके बाद नाबालिग लड़की ने अपनी मां को बताया कि आरोपी ने करीब एक महीने तक उसका यौन शोषण किया। इसके आधार पर उसके खिलाफ दूसरा मामला दर्ज किया गया। आरोपी 10 सितंबर 2025 से जेल में है। उसकी जमानत याचिका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 20 मार्च 2026 को खारिज कर दी थी। वकील का तर्क- केस केवल परेशान करने के लिए आरोपी के वकील ने कहा कि यह केस पीड़ित की बड़ी बहन से आरोपी के संबंधों के कारण दर्ज कराया गया। बड़ी बेटी के साथ संबंधों को लेकर आरोपी को परेशान करने के लिए उस पर ये आरोप लगाए गए। आरोपी एक साल से जेल में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी एक साल से ज्यादा समय से जेल में है। केस की सुनवाई पूरी होने में अभी और समय लग सकता है। कोर्ट ने कहा कि इन हालात में आरोपी को जमानत दी जा सकती है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का जमानत खारिज करने वाला फैसला रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को 7 दिन के अंदर स्पेशल कोर्ट में पेश किया जाए। इसके बाद जमानत की शर्तें पूरी होने पर उसे रिहा किया जाए। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट बोला- पटाखों पर पूरी तरह बैन नहीं:लेकिन 24 घंटे आतिशबाजी की परमिशन भी नहीं, सरकार समय तय करे सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पटाखों पर बैन हटाने की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने कहा- पूरे देश में पटाखों पर बैन लगाना मुमकिन नहीं है। पूरी पाबंदी से लोगों की भावनाएं आहत होंगी। लेकिन, 24 घंटे आतिशबाजी की इजाजत भी नहीं दी जा सकती। पटाखे चलाने के लिए समय तय करना होगा, जिससे कि त्योहार भी मनाया जा सके और लोगों को परेशानी भी न हो। पढ़ें पूरी खबर…