सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि हिंदू धर्म से गैर-हिंदू धर्म अपनाने वाला व्यक्ति पुराने सामाजिक दर्जे के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं मांग सकता। कोर्ट ने इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा है। दरअसल, सरकार ने 9 मार्च 2024 को पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, विमुक्त समुदाय और अनुसूचित जाति के लोगों को इस्लाम अपनाने के बाद मुस्लिम पिछड़ा वर्ग में शामिल करने की अनुमति दी थी। लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी गई थी। हालांकि, कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने कहा कि हिंदू व्यवस्था से गैर-हिंदू व्यवस्था में जाने वाला व्यक्ति संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत सिर्फ पुराने सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर सकारात्मक कार्रवाई का दावा नहीं कर सकता। अनुसूचित जाति का दर्जा सिर्फ हिंदू, बौद्ध या सिख धर्म को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के 1950 के अनुसूचित जाति आदेश का जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति का दर्जा हिंदू, बौद्ध या सिख धर्म के अलावा दूसरे धर्मों के लोगों को नहीं दिया जा सकता। कोर्ट के मुताबिक, ऐसे व्यक्ति का अपने मूल जाति से जुड़ा अनुसूचित जाति दर्जा खत्म हो जाता है। 10 सवालों में समझें पूरा मामला 1. विवाद किस बात पर था? तमिलनाडु सरकार ने व्यवस्था बनाई थी कि अगर कोई आरक्षित वर्ग का व्यक्ति इस्लाम धर्म अपनाता है, तो उसे मुस्लिम पिछड़ा वर्ग (BC-Muslim) का जाति प्रमाणपत्र मिल सकता है। मुख्य विवाद यही था कि क्या धर्म बदलने के बाद किसी को उसकी पुरानी जाति के आधार पर यह नया प्रमाणपत्र मिलना चाहिए या नहीं। 2. तमिलनाडु सरकार ने क्या आदेश दिया था? 9 मार्च 2024 के सरकारी आदेश के तहत, पिछड़ा वर्ग (BC), अति पिछड़ा वर्ग (MBC), विमुक्त समुदाय (DNC) और अनुसूचित जाति (SC) से इस्लाम अपनाने वालों को राज्य के 7 तयशुदा मुस्लिम पिछड़े समुदायों में शामिल करके आरक्षण प्रमाणपत्र देने का नियम बनाया गया था। 3. मामला अदालत तक कैसे पहुंचा? समीर अहमद नाम के व्यक्ति ने 2015 में इस्लाम अपनाया और 'मुस्लिम लेब्बई' समुदाय का प्रमाणपत्र मांगा। स्थानीय राजस्व अधिकारी ने उनका आवेदन रद्द कर दिया, जिसके बाद समीर अहमद ने मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 4. मद्रास हाईकोर्ट ने क्या कहा? हाईकोर्ट ने 25 जून 2026 को सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने साफ किया कि सिर्फ इस्लाम धर्म अपनाने भर से कोई व्यक्ति राज्य के तयशुदा मुस्लिम पिछड़े वर्गों का हिस्सा नहीं बन जाता। 5. तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट क्यों गई? हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार ने 6 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सरकार का कहना था कि जो लोग पहले से सामाजिक रूप से पिछड़े हैं और आरक्षण पा रहे थे, उन्हें धर्म बदलने की वजह से इस हक से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। 6. सरकार ने अपने फैसले के पक्ष में क्या दलील दी? सरकार ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया। सरकार का कहना था कि यह फैसला पूरी जांच-पड़ताल के बाद लिया गया था, ताकि धर्म बदलने की वजह से किसी भी व्यक्ति का आरक्षण खत्म न हो। 7. सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने 7 अगस्त 2026 को दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 15 अक्टूबर को कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया। 8. सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य रूप से क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धर्म बदलने से किसी का पुराना जातिगत या सामाजिक दर्जा अपने-आप किसी दूसरी तयशुदा मुस्लिम पिछड़ी जाति में नहीं बदल जाता। इसके लिए सिर्फ धर्म परिवर्तन को आधार नहीं बनाया जा सकता। 9 संविधान का अनुच्छेद 16(4) क्या कहता है? यह नियम सरकारी नौकरियों में उन पिछड़े वर्गों को आरक्षण देता है, जिनका सरकारी सेवाओं में उचित प्रतिनिधित्व नहीं है। कोर्ट ने कहा कि पुराने सामाजिक पिछड़ेपन की आड़ लेकर धर्म बदलने के बाद नए पिछड़े वर्ग का आरक्षण नहीं मांगा जा सकता। 10. इस फैसले का असली असर क्या है? यह फैसला सिर्फ तमिलनाडु में इस्लाम अपनाने वालों को 'मुस्लिम पिछड़ा वर्ग' का प्रमाणपत्र देने से जुड़ा है। इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि धर्म बदलने वाले हर व्यक्ति का हर तरह का आरक्षण खत्म हो गया है, क्योंकि अनुसूचित जाति (SC) से जुड़े नियम संविधान के अलग प्रावधानों से तय होते हैं। धर्म बदलने पर जाति प्रमाण पत्र का क्या होता है? SC सर्टिफिकेट अवैध: धर्म बदलते ही पुराना SC सर्टिफिकेट मान्य नहीं रहता। OBC आरक्षण पर असर: नया धर्म अपनाने के बाद पुरानी जाति के आधार पर OBC कोटे का लाभ नहीं मिलता। अदालतों का रुख: सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के अनुसार, राज्य सरकारें धर्म बदलने वालों को पुरानी जाति मानकर आरक्षण नहीं दे सकतीं। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट का आदेश- CJP प्रोटेस्ट का CCTV सुरक्षित रखें: प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई पर केंद्र को नोटिस सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को CJP प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशन और इंटरनेट बंद करने और जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के मामले पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा- हम 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई पर केंद्र को नोटिस जारी कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…