विदेश में बैठकर वारदातों को अंजाम दे रहे कुख्यात गैंगस्टर रोहित गोदारा से जुड़े कपूरीसर (लूणकरणसर) स्थित मकान को पिछले दिनों बुलडोजर चलाकर ढहाने का मामला अब राजस्थान उच्च न्यायालय (जोधपुर) पहुंच गया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस रहस्यमयी घटनाक्रम में नया मोड़ आ गया है। कपूरीसर निवासी रोहित गोदारा की भाभी शकुंतला देवी ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने अनधिकृत रूप से उनके आवासीय परिसर में घुसकर मकान को ध्वस्त करने का प्रयास किया। मामले में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुनील बेनीवाल की एकलपीठ ने बीकानेर पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता द्वारा 10 दिन के भीतर प्रस्तुत किए जाने वाले नए अभ्यावेदन पर गंभीरता से विचार करें। यदि आरोपों में सत्यता पाई जाती है, तो संबंधित थानाधिकारी को तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने और कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएं। याचिकाकर्ता की और से पैरवी एडवोकेट कौशल गौतम और नवनीत सिंह ने की। एफबीआई की चार्जशीट में भी गूंजा था रोहित गोदारा का नाम रोहित गोदारा केवल राजस्थान या भारत में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के राडार पर भी है। हाल ही में कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के तार जोड़ते हुए अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई ने अपनी चार्जशीट में बड़ा दावा किया था। एफबीआई के अनुसार, भारत की जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई, भगोड़े गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा समेत कई गैंगस्टर्स के नेटवर्क का इस्तेमाल इस वारदात में हुआ था। अमेरिका द्वारा भारतीय अपराधियों और उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए चलाए जा रहे “ऑपरेशन हार्ड बॉल’ के तहत अमेरिकी फेडरल कोर्ट में 37 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, जिसमें रोहित गोदारा का नाम प्रमुखता से शामिल है। रात के अंधेरे में चली थी जेसीबी, रहस्य बरकरार उल्लेखनीय है कि 13 जुलाई की रात लूणकरणसर कस्बे से करीब 16 किलोमीटर दूर तेजाणा ढाणी स्थित रोहित गोदारा से जुड़े दो मंजिला मकान पर अचानक बुलडोजर चला दिया गया था। देर रात पहुंची जेसीबी ने मकान के पिछले हिस्से को पूरी तरह से ढहा दिया, दीवारें जमींदोज कर दीं और मुख्य हिस्से के दरवाजे-खिड़कियों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। अगली सुबह जब ग्रामीणों को घटना का पता चला तो मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। हालांकि, घटना के कई महीने बीत जाने के बाद भी सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि यदि यह कार्रवाई पुलिस या प्रशासन की मौजूदगी में आधिकारिक तौर पर नहीं हुई, तो आखिर देर रात बुलडोजर किसने चलाया? अब तक किसी भी विरोधी गैंग या सिरफिरे ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है, और स्थानीय ग्रामीण भी खौफ के कारण कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु 10 दिन की मोहलत: याचिकाकर्ता शकुंतला देवी को बीकानेर एसपी के समक्ष अपनी शिकायत और सभी साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए 10 दिनों का समय दिया गया है। निष्पक्ष जांच के आदेश: बीकानेर एसपी को शिकायतों और दस्तावेजों की जांच कर तथ्यों की सत्यता जांचने के निर्देश दिए गए हैं। केस दर्ज हाे सकता है: यदि जांच में बिना आधिकारिक स्वीकृति या अवैध रूप से संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की पुष्टि होती है, तो आरोपियों पर मामला दर्ज होगा।