नगर निगम चुनाव में भाजपा का बोर्ड बनने के अगले ही दिन कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई सड़क पर आ गई। वरिष्ठ और पूर्व पार्षदों समेत नाराज शहर कांग्रेस नेताओं ने शहर कांग्रेस ​अध्यक्ष सुनील शर्मा और विधायकों अमीन कागजी व रफीक खान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। टिकट वितरण से चुनाव संचालन तक सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस से दिल्ली में पार्टी हाईकमान तक शिकायत ले जाने का ऐलान किया। बैठक में तीन प्रस्ताव पारित किए गए। पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी के बाहर धरना, फिर ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी तक मार्च और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए जयपुर कांग्रेस की ‘हकीकत’ जनता और पार्टी नेतृत्व के सामने रखने की बात कही गई। नेताओं ने कहा कि वे कांग्रेस के साथ थे, हैं और रहेंगे, लेकिन पार्टी को नुकसान पहुंचाने वालों की शिकायत राहुल गांधी तक पहुंचाई जाएगी। संगठन सृजन नहीं, ‘संगठन तोड़ो अभियान’ था पूर्व पार्षदों ने आरोप लगाया कि संगठन सृजन अभियान के नाम पर पुराने कार्यकर्ताओं को किनारे किया गया। पूर्व डिप्टी मेयर असलम फारूकी ने अमीन कागजी और रफीक खान पर अपने ही कार्यकर्ताओं को ‘धोखा’ देने का आरोप लगाया। डॉ. दीपाली ने आरोप लगाया कि महिला कांग्रेस को एक भी टिकट नहीं दिया, जबकि नेताओं की पत्नियों को टिकट मिले। पूर्व पार्षद वसीम खान ने कहा कि पार्टी तोड़ने वालों को टिकट दिए गए। आरआर तिवारी ने चुनाव से पहले अमीन कागजी और रफीक खान के कई वार्डों के टिकट वितरण पर प्रभाव का आरोप लगाया था। डोटासरा को पत्र: ‘टिकट नीति थी, चुनाव रणनीति नहीं’ मित्रोदय गांधी समेत कई नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को पत्र भेजकर शहर अध्यक्ष सुनील शर्मा की भूमिका पर सवाल उठाए। आरोप लगाया कि फोकस टिकट वितरण पर रहा, जबकि चुनाव संचालन की ठोस रणनीति नहीं बनी। रूठे कार्यकर्ताओं को मनाने, चुनाव संचालन समिति को सक्रिय करने और जमीनी कार्यकर्ताओं से संवाद की बजाय अपने प्रभाव में लेने पर जोर रहा। जिलाध्यक्ष सुनील शर्मा ने कहा, “मेरे या कांग्रेस विधायकों अथवा पार्टी के खिलाफ बात करने वाले वे लोग हैं, जिन्होंने कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ा। जो पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़े हैं, उनके विरोध पर क्या ध्यान देना।”