ताकि पता चले कितनों को फायदा मिला पंचायत चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की कितनी संतानें हैं, शैक्षिक योग्यता क्या है? इसका डेटाबेस तैयार होगा। पहली बार है जब निर्वाचन आयोग और सरकार ये आंकड़े तैयार करा रहे हैं। राज्य सरकार ने पंचायत और निकाय चुनाव लड़ने के लिए दो से अधिक संतानों की बाध्यता खत्म कर चुकी है। सरकार अब नया डेटाबेस तैयार कराएगी, जिससे पता चलेगा कि डेढ़ लाख से अधिक पदों के लिए हुए पंचायत चुनाव में कितने-कितने बच्चों वाले प्रत्याशी मैदान में उतरे और इस बाध्यता के खत्म होने का फायदा कितने लोगों को मिला? पंचायत चुनाव की नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। नामांकन फॉर्म में संतान संबंधी कॉलम रखा गया है। इसी के जरिए सांख्यिकीय आंकड़े तैयार होंगे। इससे पता चलेगा कि चुनाव लड़ने वाले और जीतने वाले कितने प्रत्याशियों की कितनी संतानें हैं? कितने प्रत्याशी दो या इससे कम संतानों की श्रेणी में रहे और कितने दो से अधिक संतानों वाली श्रेणी में आए। वर्ष 2020 में 11वें पंचायती राज चुनावों में 3500 से अधिक वार्ड पंचों के पदों पर चुनाव नहीं हो सके थे। ये पद खाली रह गए थे। विभिन्न चरणों के मतदान के बाद जारी आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआती तीन चरणों में ही 2700 से अधिक वार्डों में कोई नामांकन नहीं आया था। अंतिम चौथे चरण की समाप्ति तक यह संख्या बढ़कर 3500 के पार पहुंच गई थी। पद खाली रहने के ये तीन बड़े कारण थे 1. दो से अधिक संतान का नियम : वर्ष 2020 के चुनाव तक पंचायत चुनाव लड़ने के लिए दो से अधिक संतान नहीं होने और शैक्षणिक योग्यता का नियम था। ऐसे में कई वार्डों में आरक्षित श्रेणियों, जैसे विशेष वर्ग की महिलाओं, एससी और एसटी उम्मीदवार नहीं मिले। 2. शून्य नामांकन : कई दूरदराज के ग्रामीण वार्डों में आरक्षण की लॉटरी बदलने के बाद संबंधित आरक्षित वर्ग का कोई व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए आगे नहीं आया। इसके चलते इन वार्डों में किसी ने नामांकन पत्र ही दाखिल नहीं किया था। 3. परिसीमन का विरोध और बहिष्कार : कई गांव पंचायतों में नई ग्राम पंचायतों के गठन या अनुचित परिसीमन को लेकर ग्रामीणों में काफी नाराजगी थी। इसके चलते दर्जनों गांवों में ग्रामीणों ने पंचायत चुनावों का पूर्ण बहिष्कार कर दिया था। सख्ती भी...कॉलम खाली छोड़ा तो फॉर्म निरस्त किया जा सकता है नामांकन फॉर्म तथा शपथ पत्र का कोई भी कॉलम खाली नहीं रहना चाहिए। यदि संतान संबंधी कॉलम के अलावा कोई अन्य कॉलम खाली पाया जाता है तो रिटर्निंग अधिकारी उम्मीदवार को नोटिस देगा। कमी पूरी नहीं करने पर नामांकन खारिज होगा। चरित्र प्रमाण-पत्र की कॉपी संलग्न करने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। कोर्ट में लंबित मामलों, चल-अचल संपत्ति और देनदारियों की जानकारी देने के लिए उम्मीदवारों को 50 रुपए के स्टांप पेपर पर शपथ पत्र देना होगा। बाध्यता खत्म होने के बाद चुनाव लड़ने वालों का सही और पूरा डेटा मिल सकेगा सांख्यिकीय आंकड़े तैयार करने के लिए संतान संबंधी कॉलम रखा गया है। इससे पता चलेगा कि दो बच्चों की बाध्यता खत्म होने के बाद दो से अधिक संतान वाले कितने लोगों ने चुनाव लड़ा। वैसे लगभग सभी प्रत्याशी यह कॉलम भर रहे हैं। यदि कोई संतान संबंधी जानकारी नहीं देना चाहे तो उससे जबरन नहीं भरवाया जाएगा।- राजेश वर्मा, सचिव, राज्य निर्वाचन आयोग