जिला न्यायालय परिसर में शनिवार को साल की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत लगी। जिला एवं सेशन जज ज्ञान प्रकाश गुप्ता के नेतृत्व में 7 घंटे तक सुनवाई के दौरान 8 लाख 73 हजार 720 मामलों का सहमति और राजीनामे से निपटारा हुआ। साथ ही 42.55 करोड़ रुपए के अवार्ड पारित किए गए। आंकड़ों और मुकदमों के निस्तारण के परे यह दिन कई टूटते परिवारों और बिखरे रिश्तों के लिए नई उम्मीद लेकर आया। समझाइश ऐसी रही कि कहीं 11 साल से अलग रह रहे पति-पत्नी फिर एक हो गए, तो कहीं वर्षों से पोतों के लिए तरस रही दादी को उनका अधिकार मिला। पारिवारिक कोर्ट-1 की जज रेखा चौधरी, एमएससीटी-1 कोर्ट के जज गणपत लाल विश्नोई, एडीजे-5 मुकेश चावला, एसीजेएम-4 मर्यादा शर्मा, एनआईए-4 अक्षिता जैन और न्यायिक मजिस्ट्रेट (उत्तर-1) आलोक भारद्वाज की मौजूदगी में ये समझौते हुए। एडीजे राहुल चौधरी ने बताया कि लोक अदालत के जरिए निपटे सिविल मामलों में पूरी कोर्ट फीस वापस लौटा दी जाती है। सुखद पहलू... राजीनामे से जुड़े टूटे रिश्ते केस 1 : कड़वाहट बदली प्यार में, मासूम को माता-पिता का एक साथ साया मिला दंपती 2014 से अलग रह रहा था। पति भरण-पोषण के 13 हजार रुपए प्रति माह भी नहीं दे रहा था। वारंट दर वारंट जारी हुए तो पुलिस ने पति को कोर्ट में पेश किया। समझाने पर उसने पत्नी व बच्चे को साथ रखने और 5 हजार रुपए अलग से देने की सहमति दी। केस 2: तीन साल बाद दादी की गोद में खेलेंगे पोते, महीने में दो बार मिल सकेंगे हादसे में बेटे की मौत के बाद उसके दोनों बच्चे मां के साथ थे। दादी ने कस्टडी के लिए दावा किया। तीन साल से लंबित केस में जज की प्री-काउंसलिंग रंग लाई। अब दादी महीने में दो बार पोतों से मिल सकेंगी और बड़े त्योहारों पर बच्चे उनके घर रुकेंगे। केस 3 : बिछड़ी मां को हर महीने मिलेगा 11 साल के बेटे का साथ 2023 में तलाक के बाद माता-पिता ने अलग शादियां कर ली थीं। 11 साल का बेटा पिता के साथ रहता था और मां से मिलने को तैयार नहीं था। मां ने 2024 में कस्टडी या मिलने का वाद दायर किया। काउंसलिंग के बाद लोक अदालत में राजीनामा हुआ कि मां हर महीने के किसी भी एक शनिवार को अपने बेटे से मिल सकेगी। केस 4: हादसे में उजड़ा सुहाग, पीड़ित परिवार को 85 लाख रुपए का संबल रेतड़ा निवासी प्रवीण की पिछले साल हादसे में मौत हो गई। पत्नी सुनीता ने मुआवजे के लिए एमएसीटी-1 कोर्ट में केस किया था। जज गणपत लाल विश्नोई की समझाइश पर एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी 85 लाख मुआवजे पर सहमत हुई। केस 5: निगम नरम पड़ा, 20 हजार का बकाया बिजली बिल 5 हजार में निपटा हिरणमगरी के दिवंगत मोहनलाल के बेटे ने घर पर सोलर और 3-फेस कनेक्शन पत्नी के नाम लिया। पिता का पुराना कनेक्शन नहीं कटवाया। 20 हजार के बिल से परिवार परेशान हो गया। समझाइश के बाद महज 5 हजार में कनेक्शन का निस्तारण हुआ। एनआई एक्ट के सबसे ज्यादा मामले आए 13,838 लंबित और 8.59 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निपटारा किया गया। सबसे ज्यादा एनआई एक्ट (चेक बाउंस) के 2,674 मामले रहे। इनमें 25.04 करोड़, जबकि दुर्घटना दावा के 200 मामलों में 9.87 करोड़ के अवार्ड पारित हुए। फैमिली कोर्ट के 496 केस रहे। एक दिन में ऐसे निपटे 8.79 लाख मामले करीब 98.4% (8.59 लाख) केस प्री-लिटिगेशन के हैं। यानी जो दायर होने से पहले ही समझौते से सुलझा लिए जाते हैं। लोक अदालत में कई बेंच साथ काम करती हैं। बैंक, बिजली निगम आदि से जुड़े सभी समझौता योग्य विवाद भी होते हैं। सभी बड़े केस नहीं होते। कुछ में बकाया राशि या भुगतान को लेकर समझौता होता है।