आरसीए चुनावों को लेकर नाम वापसी की आखिरी तारीख सोमवार को है, लेकिन रविवार को भी फाइनल टीम गठन के लिए सत्ता-संगठन के प्रयास बेअसर रहे। भाजपा हाईकमान तक के प्रयासों के बाद भी नेतापुत्रों का क्रिकेट मोह खत्म नहीं हो रहा। ये सभी चुनावी पिच पर बैटिंग के लिए खुद को परफेक्ट ‘बल्लेबाज’ मानते हैं। मामला एक बार फिर भाजपा हाईकमान तक पहुंचा है। कुछ का दावा है कि जब कई राज्यों में नेता क्रिकेट का संचालन कर रहे हैं तो राजस्थान में ऐसा क्यों नहीं? दुनिया की क्रिकेट (आईसीसी) का सफल संचालन केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह कर रहे हैं। इसके अलावा अरुण जेटली के बेटे रोहन जेटली (दिल्ली), ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमन सिंधिया (मध्य प्रदेश), हिमाचल के पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के बेटे अरुण सिंह धूमल (आईपीएल चेयरमैन) और शरद पवार के बेटे रोहित राजेन्द्र पवार (महाराष्ट्र) के अलावा कई सांसद और विधायक कई राज्यों में क्रिकेट से जुड़े हैं और सफल संचालन कर रहे हैं तो फिर राजस्थान में नेताओं को क्रिकेट की सत्ता में आने से रोकने के प्रयास क्यों किए जा रहे हैं? बृजकिशोर के मामले की सुनवाई आज हाईकोर्ट में आरसीए चुनाव में सरकार के पैनल के प्रमुख दौसा जिला क्रिकेट संघ के सचिव बृजकिशोर उपाध्याय के मामले की सुनवाई सोमवार को हाईकोर्ट में होगी। पूर्व सचिव प्रदीप नागर ने उनके जिला सचिव बनने को अवैध बताते हुए याचिका लगाई है। सवाल है कि जब सरकार ने बृजकिशोर का नाम अध्यक्ष पद पर तय कर दिया तो फिर सचिव पद के लिए नामांकन क्यों किया? साथ ही, 3 नए जिलों के मामले में आज हाई कोर्ट और मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। आज नामांकन वापसी के बाद तस्वीर साफ होगी फिलहाल सोमवार को नामांकन वापसी के बाद ही तस्वीर साफ होगी। देखना दिलचस्प होगा कि नेतापुत्र चुनावी घमासान में बने रहते हैं या फिर नाम वापस लेते हैं। नेतापुत्रों के अलावा एडहॉक कमेटी के पूर्व कन्वीनर डीडी कुमावत ने भी अध्यक्ष पद पर दावेदारी पेश कर रखी है। रविवार को स्क्रूटनी के बाद सभी 30 नाम वैलिड पाए गए। नेतापुत्रों ने आरसीए से नहीं लिया एक भी पैसा : 29 महीने तक आरसीए में एडहॉक कमेटी का राज रहा। धनंजय खींवसर पूरे समय एडहॉक कमेटी में रहे लेकिन आरसीए से एक पैसा नहीं उठाया। अन्य नेतापुत्रों ने भी टीए-डीए नहीं लिया। आरसीए से मिली जानकारी के मुताबिक एडहॉक कमेटी के कार्यकाल के दौरान 4 जिला संघों के सचिवों ने लगभग 42 लाख रुपए टीए-डीए के रूप में लिए ​थे।