जिले के आठों नगरीय निकायों में 240 पार्षद चुनकर शहरी सरकार का नया खाका तैयार हो गया है। इस बार चुनाव में युवाओं को टिकट देने के बावजूद नई शहरी सरकार में युवा पार्षदों की भागीदारी पिछली बार की तुलना में 8.78 प्रतिशत अंक घट गई है। इस बार 21 से 35 वर्ष आयु वर्ग के 90 पार्षद चुनकर आए हैं, जो कुल पार्षदों का 37.5% हैं। पिछली बार जिले के पांच नगरीय निकायों में 175 वार्ड थे। इनमें 81 युवा पार्षद चुने गए थे। तब युवा पार्षदों की हिस्सेदारी 46.28% थी। इस बार तीन नए निकाय जुड़ने और कुल वार्ड बढ़कर 240 होने के बावजूद युवा प्रतिनिधित्व का अनुपात कम हुआ है। युवा प्रत्याशियों को राजनीतिक दलों ने इस बार टिकट दिए और इनमें से कई जीतकर भी आए। कई वार्डों में युवा प्रत्याशी आमने-सामने रहे तो कुछ जगह युवाओं ने बुजुर्ग प्रत्याशियों को मात दी। खास बात यह है कि चुने गए युवा पार्षदों में कॉलेज में पढ़ रहे छात्र भी हैं। इनके अलावा पॉलीटेक्निक, एमबीए और बीएससी-बीएड जैसी शैक्षणिक योग्यता रखने वाले युवा भी शहरी सरकार का हिस्सा बने हैं। 36-50 आयु के 108 पार्षद, खानपुर में 1 भी बुजुर्ग नहीं नई शहरी सरकार में सबसे बड़ा प्रतिनिधित्व 36 से 50 वर्ष आयु वर्ग का है। इस आयु वर्ग के 108 पार्षद चुने गए हैं। झालरापाटन में इस उम्र के सबसे ज्यादा 11 पार्षद हैं, वहीं 50 वर्ष से अधिक आयु के 13 बुजुर्ग पार्षद भी चुने गए हैं। खानपुर में एक भी बुजुर्ग पार्षद नहीं है। झालावाड़ नगर परिषद में 2, अकलेरा में 3, झालरापाटन में 1, भवानीमंडी में 2, पिड़ावा में 3, डग नगरपालिका में 1 बुजुर्ग पार्षद चुना गया है।