तिलवाड़ा, बालोतरा में भादवा बीज के मौके पर दो दिवसीय धार्मिक आयोजन हुआ। ये आयोजन पश्चिमी राजस्थान के लोकआस्था के संत श्री रावल मल्लीनाथ जी और श्री राणी रूपादे जी की कृपा से हुआ। श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा ने पालिया और मालाजाल में इसे आयोजित किया। इस दौरान श्रद्धा, भक्ति, लोकसंस्कृति और सामाजिक समरसता का संगम देखने को मिला। इन धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत शाम की आरती से हुई। इसमें विशेष हवन-पूजन, रात्रि जागरण, मध्यरात्रि आरती, मंगला आरती और विशेष भोग शामिल थे। साथ ही धर्मध्वजारोहण, गैर नृत्य, ढोल-थाली और नगाड़ा वादन भी हुआ। मुख्य समारोह और महाप्रसादी में मालाणी समेत कई गांवों और इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और धर्मलाभ लिया। इस पावन आयोजन की शुरुआत भाद्रपद शुक्ल पक्ष प्रतिपदा, यानी 12 सितंबर को शाम की आरती से हुई। इसके बाद श्री राणी रूपादे जी मंदिर, पालिया परिसर में विशेष हवन-पूजन और वैदिक धार्मिक अनुष्ठान पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ किए गए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संस्थान प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरिश्चंद्र सिंह जसोल ने आराध्य देवों का पूजन किया। उन्होंने क्षेत्र, समाज और श्रद्धालुओं की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति के लिए हवन में आहुतियां दीं। धूप-दीप, वैदिक मंत्रोच्चार और आराध्य देवों के जयघोष से मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया। 12 सितंबर की रात को श्री राणी रूपादे जी मंदिर, पालिया परिसर में भव्य रात्रि जागरण हुआ। इसमें सुप्रसिद्ध वीणा वादक और भजनी महेशाराम मेघवंशी और उनकी मंडली ने वीणा की मधुर धुन और सुरीली आवाज से भक्तिरस बिखेरा। भजनों के माध्यम से संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी, श्री राणी रूपादे जी, गुरु श्री उगमसी जी भाटी एवं मेघधारू जी के जीवन चरित्र, त्याग, तपस्या, शौर्य, धर्मनिष्ठा, भक्ति और लोककल्याण से जुड़े प्रेरक प्रसंगों का संगीतमय वर्णन किया गया। भक्तिमय प्रस्तुतियों से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और देर रात्रि तक आराध्य महापुरुषों के जयकारे गूंजते रहे। इसी क्रम में श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर, मालाजाल एवं थान मल्लीनाथ–तिलवाड़ा में भी राती जोगा आयोजित हुए। श्री राणी रूपादे जी मंदिर, पालिया में मध्यरात्रि की विशेष आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर दर्शन एवं धर्मलाभ प्राप्त किया। मंगला आरती से हुआ भादवा बीज का मंगल प्रभात 13 सितम्बर को भादवा बीज की पावन प्रातः बेला में तीनों मंदिरों में विधि-विधान से मंगला आरती संपन्न हुई। आरती के बाद तीनों मंदिरों में विशेष भोग अर्पित किया गया। विभिन्न गांवों एवं क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन कर प्रसादी एवं धर्मलाभ प्राप्त किया। दिनभर चले धार्मिक आयोजन में पारंपरिक गैर नृत्य, ढोल-थाली की टंकार एवं पुष्कर से आए नगाड़ा कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। ढोल-थाली और नगाड़ों की गूंज के बीच पारंपरिक गैर नृत्य ने राजस्थान की समृद्ध लोकसंस्कृति के जीवंत दर्शन कराए। कलाकारों की प्रस्तुतियों से श्रद्धालु भावविभोर हुए और संपूर्ण वातावरण भक्ति एवं उल्लास से भर उठा। महंत सोमेश्वर गिरी महाराज के पावन सान्निध्य में फहराई धर्मध्वजा श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर, मालाजाल में बिजोलाई बालाजी आश्रम, जोधपुर के महंत सोमेश्वर गिरी महाराज के पावन सान्निध्य में धर्मध्वजारोहण समारोह आयोजित हुआ। संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने मालाणी के प्रबुद्धजनों एवं सर्वसमाज की गरिमामयी उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के मध्य धर्मध्वजा फहराई। धर्मध्वजा के आरोहण के साथ श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री राणी रूपादे जी के जयघोष से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। विभिन्न ग्रामों से पहुंचे प्रबुद्धजनों, राजपूत समाज, सर्वसमाज, युवाओं एवं श्रद्धालुओं की सहभागिता ने मालाणी की लोकआस्था और सामाजिक समरसता की गौरवशाली परंपरा को साकार किया। मुख्य समारोह में वक्ता राजवीर सिंह चलकोई ने मालाणी के गौरवशाली इतिहास एवं संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी के विराट व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने श्री रावल मल्लीनाथ जी के शौर्य, वीरता, धर्मरक्षा, प्रजावत्सलता, सुशासन, आध्यात्मिक साधना एवं लोककल्याण से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उनके वीर योद्धा, कुशल शासक एवं संत-पुरुष स्वरूप से जनसमुदाय को परिचित कराया। उन्होंने विरमदेव जी, जगमाल जी एवं जेतमाल जी सहित वंश परंपरा के सम्माननीय महापुरुषों के जीवन, योगदान और उनसे जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों की जानकारी देते हुए मालाणी की समृद्ध वंश परंपरा एवं गौरवशाली विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने श्री रावल मल्लीनाथ जी से जुड़ी वंश परंपरा के क्रमिक इतिहास के साथ ‘रावल’ पदवी की उत्पत्ति, उसकी परंपरा एवं ऐतिहासिक महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी। राजवीर सिंह चलकोई ने कहा कि अपने इतिहास एवं पूर्वजों के गौरव को जानना भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और संस्कार का आधार है। इतिहास के साथ शिक्षा, संस्कार और आधुनिक ज्ञान का समन्वय समाज को सशक्त एवं भविष्य के लिए सक्षम बनाता है। उन्होंने सर्वसमाज में शिक्षा के प्रसार, बालक-बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं उच्च शिक्षा से जोड़ने, युवाओं को प्रतिस्पर्धी युग के अनुरूप आगे बढ़ाने तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, इतिहास, संस्कृति एवं संस्कारों से परिचित कराने पर विशेष बल दिया। उन्होंने श्री रावल मल्लीनाथ जी के जीवन से प्रेरणा लेकर शौर्य के साथ शिक्षा, परंपरा के साथ प्रगति, संस्कारों के साथ आधुनिक ज्ञान तथा सामर्थ्य के साथ लोकसेवा की भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उनका उद्बोधन मालाणी के गौरवशाली इतिहास, राठौड़ वंश की समृद्ध परंपरा एवं श्री रावल मल्लीनाथ जी के संत-शासक स्वरूप से लेकर वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्वों तक केंद्रित रहा। संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने अपने उद्बोधन में संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी, श्री राणी रूपादे जी, गुरु श्री उगमसी जी भाटी एवं मेघधारू जी के जीवन चरित्र तथा उनके आध्यात्मिक और लोककल्याणकारी योगदान का स्मरण किया। उन्होंने श्री रावल मल्लीनाथ जी के शौर्य, धर्मनिष्ठा एवं लोककल्याण, श्री राणी रूपादे जी की भक्ति, त्याग एवं आध्यात्मिक साधना, गुरु श्री उगमसी जी भाटी की गुरु परंपरा तथा मेघधारू जी से जुड़े प्रेरक प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन महान विभूतियों की शिक्षाएं समाज को धर्म, सेवा, सद्भाव, त्याग, संस्कार एवं सामाजिक समरसता की दिशा प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि मालाणी की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत पीढ़ियों से समाज का मार्गदर्शन करती आई है। इन महापुरुषों के जीवन-दर्शन और आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा उनके बताए मार्ग को जीवन में आत्मसात करना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने समाज से एकजुटता, सेवा, संस्कार, धर्म एवं लोककल्याण की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। रावल किशन सिंह जसोल ने आयोजन में पधारे पूज्य संत-महात्माओं, अतिथियों, मालाणी के विभिन्न ग्रामों के प्रतिनिधियों, सर्वसमाज के प्रबुद्धजनों, मातृशक्ति, युवाओं, श्रद्धालुओं एवं कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। संस्थान ट्रस्टी रावत त्रिभुवन सिंह बाड़मेर ने अपने उद्बोधन में भादवा बीज के पावन आयोजन को मालाणी की धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण उत्सव बताते हुए समाज की एकता और सहभागिता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री राणी रूपादे जी की प्रेरणादायी परंपरा शौर्य, धर्म, सेवा, त्याग, लोककल्याण एवं सामाजिक समरसता के मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती है। उन्होंने समाज से अपने आराध्य महापुरुषों के इतिहास, मंदिरों, धार्मिक स्थलों एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए संगठित भाव से कार्य करने का आह्वान किया। विशेष रूप से युवा पीढ़ी को शिक्षा एवं संस्कारों के साथ अपने इतिहास और परंपराओं से जोड़ने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षित, संस्कारित एवं संगठित युवा शक्ति ही गौरवशाली विरासत को भविष्य तक पहुंचाने की सबसे मजबूत कड़ी है। रावत त्रिभुवन सिंह बाड़मेर ने पंच मंदिर निर्माण सहित संस्थान के धार्मिक एवं विकास कार्यों में समाज की व्यापक सहभागिता का आह्वान करते हुए कहा कि सामूहिक संकल्प और सहयोग से इस पावन धरा को आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणादायी धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा। पंच मंदिर निर्माण की कार्ययोजना एवं बजट से कराया अवगत संस्थान प्रबंधन समिति अध्यक्ष हरिश्चंद्र सिंह जसोल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए पूज्य संत-महात्माओं, अतिथियों, मालाणी के विभिन्न ग्रामों से पधारे प्रतिनिधियों, सर्वसमाज के प्रबुद्धजनों एवं श्रद्धालुओं का संस्थान परिवार की ओर से आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने मालाजाल एवं पालिया में प्रस्तावित धार्मिक विकास कार्यों तथा पंच मंदिर निर्माण की विस्तृत कार्ययोजना एवं प्रस्तावित बजट की जानकारी उपस्थित जनसमुदाय के समक्ष रखी। उन्होंने निर्माण कार्य की रूपरेखा, भावी स्वरूप एवं धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व से अवगत कराते हुए इस ऐतिहासिक कार्य में समाज से संगठित होकर सहभागिता एवं सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने प्रस्तावित श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर, श्री चक्रेश्वरी माता मंदिर, श्री नर्बदेश्वर महादेव मंदिर, श्री चामुंडा माता मंदिर तथा दक्षिणमुखी श्री हनुमान जी मंदिर की निर्माण योजना एवं धार्मिक महत्व के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। विशेष रूप से श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर, मालाजाल के चारों ओर प्रस्तावित भव्य बुर्जयुक्त परकोटे की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इसका स्थापत्य स्वरूप श्री रावल मल्लीनाथ जी के शौर्य, वीरता एवं मालाणी की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा का प्रतीक बनेगा। पंच मंदिरों एवं प्रस्तावित विकास कार्यों के पूर्ण होने पर यह धार्मिक परिसर राठौड़ वंश की ऐतिहासिक विरासत, आराध्य महापुरुषों की स्मृतियों एवं सर्वसमाज की लोकआस्था को एक सूत्र में जोड़ने वाला महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ियों को अपने इतिहास, शौर्य परंपरा, आराध्य महापुरुषों एवं आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने की दृष्टि से इस परिसर को राठौड़ वंश सहित समस्त समाज के महत्वपूर्ण धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक तीर्थस्थल के रूप में विकसित करने का संकल्प है। उन्होंने इस पुनीत एवं ऐतिहासिक संकल्प को साकार करने के लिए समाज से एकजुट होकर सहभागिता निभाने का आह्वान किया। संत सम्मान एवं मुख्य वक्ता का अभिनंदन मुख्य समारोह में वक्ताओं के उद्बोधन से पूर्व संस्थान की ओर से बिजोलाई बालाजी आश्रम, जोधपुर के महंत सोमेश्वर गिरी महाराज का श्रद्धापूर्वक संत सम्मान किया गया। संस्थान अध्यक्ष किशन सिंह जसोल एवं संस्थान ट्रस्टी रावत त्रिभुवन सिंह बाड़मेर ने संयुक्त रूप से महाराज श्री का पारंपरिक सम्मान एवं अभिनंदन किया। इसी क्रम में मुख्य वक्ता राजवीर सिंह चलकोई को उनके प्रेरक एवं ज्ञानवर्धक उद्बोधन के उपरांत संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया। उन्हें स्मृति चिन्ह तस्वीर, ‘महेचा राठौड़ का इतिहास’ पुस्तक, साफा एवं माला पहनाकर अभिनंदन किया गया। संस्थान परिवार ने मालाणी के गौरवशाली इतिहास, राठौड़ वंश की परंपरा, श्री रावल मल्लीनाथ जी के जीवन चरित्र, वंश परंपरा, ‘रावल’ पदवी के ऐतिहासिक संदर्भ तथा शिक्षा एवं संस्कारों पर दिए गए उनके विस्तृत उद्बोधन के लिए आभार व्यक्त किया। भादवा एकम एवं बीज के पावन अवसर पर आयोजित भोजन प्रसादी के लाभार्थी दिलीप सिंह, देवी सिंह, पोकरणा निवासी खेलाणा रहे। लाभार्थी परिवार ने श्रद्धाभाव से भोजन प्रसादी का लाभ लिया एवं समस्त श्रद्धालुओं को सादर महाप्रसादी ग्रहण कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम का प्रभावी मंच संचालन मांगू सिंह विशाला ने किया। समारोह में मालाणी के विभिन्न ग्रामों से पहुंचे प्रतिनिधियों, राजपूत समाज, सर्वसमाज के प्रबुद्धजनों, मातृशक्ति, युवाओं एवं श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। दो दिवसीय धार्मिक आयोजन ने पालिया–मालाजाल–तिलवाड़ा की ऐतिहासिक धरा को भक्ति, शौर्य परंपरा, लोकसंस्कृति, सामाजिक समरसता एवं आध्यात्मिक चेतना के अनुपम संगम में परिवर्तित कर दिया। संध्याकालीन आरती एवं विशेष हवन-पूजन से प्रारंभ होकर रात्रि जागरण, मध्यरात्रि आरती, मंगला आरती, विशेष भोग, धर्मध्वजारोहण, गैर नृत्य, ढोल-थाली की टंकार, नगाड़ा वादन, मुख्य समारोह और महाप्रसादी तक श्रद्धा एवं उत्साह का क्रम निरंतर बना रहा। श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री राणी रूपादे जी के जयकारों से गूंजते वातावरण में भादवा बीज का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ। दो दिवसीय आयोजन ने मालाणी की गौरवशाली धार्मिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ शिक्षा, संस्कार, संगठन, सेवा, लोककल्याण एवं सामाजिक समरसता का प्रेरक संदेश दिया।