सरिस्का में बाघों की बढ़ती संख्या के बीच तिंताजनक खबर है। सरिस्का बाघ अभयारण्य से एक बाघ और एक शावक लापता हैं। इनमें सबसे बड़ी टेरेटरी बनाने वाला 10 वर्षीय बाघ एसटी-15 पिछले तीन सप्ताह से नजर नहीं आया है। जबकि बाघिन एसटी-27 के दो साल के शावक का एक महीने से पता नहीं चल पा रहा है। शावक अकबरपुर रेंज में विचरण करता था। शावक के कुछ स्थानों पर पगमार्क मिलने की सूचना आई मगर कैमरा ट्रैप में कहीं नहीं िदखा। अब वन विभाग ने दोनों की तलाश में अतिरिक्त टीमें लगाई हैं। कैमरा ट्रैप खंगाले जाएंगे। बाघ एसटी-15 सरिस्का के बाघों में सबसे ज्यादा उम्र का है। चिंता की बात ये है कि उसकी टेरेटरी में 8 साल के बाघ एसटी-21 और 6 साल के बाघ एसटी-25 की आवाजाही बढ़ी है। कैमरा ट्रैप में भी उसकी तस्वीर नहीं मिली। सरिस्का में बाघों की निरंतर बढ़ती संख्या के बीच क्षेत्र को लेकर संघर्ष की स्थिति में कमजोर या उम्रदराज बाघ के दूसरे इलाके में चले जाने की संभावना रहती है। 2008 में बाघों के पुनर्वास के बाद सरिस्का में कई बाघों की मौत के मामले सामने आए हैं। इनमें एसटी-1 की जहर से, एसटी-11 की फंदे में फंसने से, एसटी-4 की आपसी संघर्ष में और एसटी-16 की हीट स्ट्रोक से मौत हुई। बाघिन एसटी-28 की मौत भी आपसी टकराव में हुई थी। सरिस्का में बाघों की मौत के मामलों के बाद वन विभाग की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठते रहे हैं। बाघों की सुरक्षा के लिए निगरानी दलों को सक्रिय रखने के साथ कैमरा ट्रैप से भी लगातार निगरानी की जाती है। अभयारण्य में बाघों के बीच संघर्ष और अन्य प्राकृतिक कारणों से होने वाली घटनाओं पर विभाग की नजर रहती है। टहला क्षेत्र की बाघिन एसटी-27 का करीब दो वर्षीय नर शावक करीब छह माह पहले घूमता हुआ अकबरपुर रेंज में पहुंचा था। इसके बाद उसने इसी क्षेत्र को अपना ठिकाना बना लिया। पिछले एक माह से वह कैमरा ट्रैप में नहीं आया है और प्रत्यक्ष रूप से भी दिखाई नहीं दिया। कुछ स्थानों पर उसके पगमार्क मिलने की सूचना है। इसके आधार पर संभावित आवागमन वाले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। मानसून के बाद जंगल में घनी वनस्पति होने से बाघों का लंबे समय तक कैमरा ट्रैप की नजर से बाहर रहना संभव है। वन विभाग नियमित कैमरा ट्रैप की तस्वीरों व मैदानी संकेतों के आधार पर शावक की स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास कर रहा है। डीएफओ बोले- बढ़ती संख्या के साथ निगरानी की चुनौतीपूर्ण हो रही: डीएफओ अभिमन्यु सहारण ने बताया कि एसटी-15 और एसटी-27 के शावक की तलाश के लिए अतिरिक्त टीमें काम कर रही हैं। कैमरा ट्रैप, गश्त और मैदानी संकेतों के आधार पर दोनों की मौजूदगी तलाश रहे हैं। सरिस्का में प्रत्येक बाघ की वन-टू-वन निगरानी की व्यवस्था है। आने वाले दिनों में कैमरा ट्रैप की तस्वीरों और टीमों की रिपोर्ट से दोनों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। फोटो: जितेंद्र शर्मा सरिस्का की करीब साढ़े तीन साल की युवा बाघिन एसटी-2401 पिछले 17 महीनों से लापता है। वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार उसे आखिरी बार 5 मार्च 2025 को देखा गया था। इसके बाद उसकी कोई लोकेशन या गतिविधि दर्ज नहीं हुई। तलाश के लिए विशेष टीमें लगाई गईं और कई इलाकों में कैमरा ट्रैप लगाए गए, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। विभाग को अब उसके मिलने की उम्मीद कम है। किसी बाघ के लापता होने की स्थिति में उसे तत्काल गणना से हटाने की कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है। एसटी-2401 को भी अभी तक मौत की पुष्टि के आधार पर नहीं हटाया गया है। वहीं बाघ एसटी-13 वर्ष 2022 से लापता है और उसे गणना से हटा दिया गया था।