उदयपुर में मेयर प्रत्याशी के नामांकन के बाद अब सभी की नजरें डिप्टी मेयर पर टिकी हुई हैं। 21 सितंबर को मेयर की वोटिंग के बाद 22 सितंबर को डिप्टी मेयर का नामांकन और वोटिंग होगी। भाजपा इसके लिए पंकज बोराणा या दिनेश भट्ट में से किसी एक को मौका दे सकती हैं। पंकज बोराणा बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के रिश्तेदार। वहीं पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट ब्राह्म्ण समाज का चेहरा हैं। पार्टी जैन मेयर चेहरे के बाद समाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से इन्हीं 2 में से किसी एक पर दांव लगा सकती हैं। गुरूवार को दोनों पार्टियों की ओर से प्रत्याशियों के सिबॉल जमा करवाए गए। इसके बाद जिला निर्वाचन विभाग ने पूनम कुंवर और पारस सिंघवी के नामाकंन की जांच कर उसे स्वीकार किया। जानकारी के अनुसार भट्ट भी मेयर नहीं बनने पर अब डिप्टी मेयर के लिए मन बना रहे हैं। पार्टी के संकेत के बाद वो हामी भर सकते हैं। गुरूवार सुबह उनकी शुगर और ब्लड प्रेशर बढ़ने की शिकायत पर रिसोर्ट से निजी अस्पताल ले जाया गया। बीजेपी को क्रॉस वोटिंग का डर दूसरी ओर, बाड़ेबंदी के बीच बदले समीकरणों में सिंघवी के मेयर प्रत्याशी बनने पर बीजेपी को क्रॉस वोटिंग का खतरा सता रहा है। हालांकि उदयपुर में अब तक वैसे निकाय चुनाव में कभी क्रॉस वोटिंग जैसी दिक्कते नहीं आई हैं। इस बार सामर और भट्ट जैसे दिग्गज चेहरों के साइडलाइन होने से कुछ पार्षदों की ओर से क्रॉस वोटिंग करने का डर है। बाड़ेबंदी के बीच पारस सिंघवी के प्रत्याशी बनाने से सन्नाटा हैं। प्रमोद सामर और दिनेश भट्ट पार्टी से नाराज प्रमोद सामर और दिनेश भट्ट किसी भी पदाधिकारी से बात नहीं करते हुए अपने रूम में रेस्ट कर रहे हैं। बुधवार शाम को सामर के बेटे और भट्ट के बेटे-पत्नी ने रिसोर्ट में पहुंचकर पार्टी पदाधिकारियों से जमकर खरी खोटी सुनाई थी। परिजनों ने सामर को घर ले जाने की पूरी कोशिश की लेकिन पार्टी पदाधिकारियों ने उन्हें समझाया। पार्टी के पदाधिकारियों से भट‌्ट और सामर के परिजनों ने साफ कहा कि जब पार्टी को मौका नहीं देना था तो क्यों इन्हें चुनाव लड़वाया? बड़े चेहरों को पार्षद महज बनाकर क्यों सीमित किया। इस तरह की राजनीति से उनका मनोबल टूटा है और सामाजिक साख को ठेस पहुंची है। पारस​ सिंघवी के मेयर नामाकंन का विरोध दूसरी तरफ पारस​ सिंघवी के मेयर नामाकंन के बाद पूर्व पार्षद प्रेमसिंह शक्तावत के इस्तीफे से पार्टी पदाधिकारियों में हड़कंप मच गया। सूत्रों के अनुसार शक्तावत के इस्तीफे वाले पोस्ट के बाद पार्टी के कुछ प्रमुख नेता उनसे समझाइश करने उनके घर भी गए और समझाइश करने की कोशिश की। शक्तावत बुधवार शाम को सोशल मीडिया ग्रुप में प्राथमिक इस्तीफा देने की बात लिखी थी। सिंघवी के मेयर प्रत्याशी बनने के साथ कटारिया के दोनों दामाद में एक किसी के एक के भी डिप्टी मेयर बनने की संभावनाए नगण्य हो गई। जैन समाज से आने वाले सिंघवी के आने से सामाजिक समीकरण और गजपाल-ताराचंद गुट में यह संभावनाएं न के बराबर हैं। इस बार राज्यपाल कटारिया के दामाद के भाई आकाश वागरेचा और अतुल चंडालिया भी पार्षद बने हैं। दिनेश भट्ट के मेयर बनने की स्थिति में अतुल चंडालिया के डिप्टी मेयर बनने के कयास थे। --- ये खबर भी पढ़िए- सामर-भट्ट की खींचतान में पारस सिंघवी ने बाजी मारी:RSS की पसंद पर पार्टी ने लगाया दांव; नए पार्षदों से वन-टू-वन किया था संपर्क