उदयपुर में नगर निगम के 7वें बोर्ड में भाजपा के पारस सिंघवी मेयर बन गए हैं। सिंघवी को 55 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की पूनम कुंवर राठौड़ को 25 वोट मिले हैं। बहुमत के लिए कुल 41 वोट चाहिए थे। सिंघवी को बहुमत से 14 वोट ज्यादा मिले। सिंघवी ने निर्वाचन अधिकारियों के सामने मेयर पद की शपथ ली। भाजपा को पार्टी के सभी 53 पार्षदों के साथ 2 निर्दलीय पार्षदों ने भी वोट दिया। वहीं कांग्रेस की प्रत्याशी को पार्टी के 23, माकपा के 1 और एक निर्दलीय पार्षद ने भी वोट दिया। सूत्रों के अनुसार- भाजपा में डिप्टी मेयर के लिए दिनेश भट‌्ट का नाम लगभग तय है। कांग्रेस की तरफ से लक्ष्मी नारायण मेघवाल के नाम की चर्चा है। डिप्टी मेयर के लिए मंगलवार को नामांकन होगा। इसके बाद वोटिंग होगी और रिजल्ट आएगा। इससे पहले नगर निगम के हॉल में मेयर पद के लिए वोटों की काउटिंग के बाद रिजल्ट घोषित कर दिए गए। बहुमत के लिए चाहिए थे 41 वोट उदयपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा के पारस सिंघवी और कांग्रेस की पूनम कुंवर राठौड़ के बीच मुकाबला था। नगर निगम के कुल 80 वार्ड हैं। ऐसे में मेयर के लिए 41 वोट जरूरी थे। भाजपा के पार्षद यशवंत आंचलिया सबसे पहले वोट देने पहुंचे। वोटिंग के दौरान सांसद मन्नालाल रावत, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, जिलाध्यक्ष गजपालसिंह राठौड़ भी मौजूद थे। शहर विधायक ताराचंद जैन सबसे आखिरी में पहुंचे। वे शुरुआत में अपने ऑफिस बैठे-बैठे ही समर्थकों से फोन पर अपडेट ले रहे थे। आधे से ज्यादा पार्षद वोट देकर बाहर आ गए, तब जैन वहां पहुंचे। बाडे़बंदी से पहुंचे नगर निगम ऑफिस दोनों ही दल बाड़ेबंदी के बीच अपने-अपने पार्षदों को सीधे नगर निगम लेकर पहुंचे, जहां वोटिंग हुई। इससे पहले रविवार को पार्टी पदाधिकारियों ने सभी पार्षदों को बैलेट पेपर से वोटिंग करने का पूरा तरीका समझाया था। संख्या बल पूरा नहीं होने के बावजूद कांग्रेस का दावा था कि इस बार भाजपा के कई पार्षद क्रॉस वोटिंग करेंगे और कांग्रेस का मेयर प्रत्याशी जीतेगा। निर्दलीय और माकपा का यह रहा रुख चुनाव से ठीक पहले समीकरणों में थोड़ा बदलाव हुआ था। माकपा पार्षद ने कांग्रेस की पूनम कुंवर को समर्थन देने का एलान किया था। वहीं, निर्दलीय पार्षद कमलेश बोराणा भाजपा को समर्थन देकर उनकी बाड़ेबंदी में शामिल हो गए थे। केसरिया जी के किए थे दर्शन वोटिंग से एक दिन पहले रविवार को भाजपा के सभी पार्षदों को नाथद्वारा हाईवे के रिसोर्ट से केसरिया जी और जावर माता दर्शन के लिए ले जाया गया था। भाजपा ने क्रॉस वोटिंग के खतरे को टालने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। पार्टी के बड़े नेताओं ने एक-एक पार्षद से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उन्हें पार्टी के पक्ष में वोट देने के लिए पूरी तरह तैयार किया था।