उदयपुर में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव में इस बार बड़े नेताओं और उनके परिवारों की सीधी एंट्री हुई है। दोनों प्रमुख पार्टियों में स्थानीय कार्यकर्ताओं की जगह खुद वरिष्ठ नेता चुनाव लड़ रहे हैं या अपने बेटा-बेटी को मैदान में उतारा है। पूर्व मंत्री मांगीलाल गरासिया, पूर्व विधायक दलीचंद डांगी, विधायक पुष्करलाल डांगी के बेटे शांतिलाल डांगी, विधायक फूलसिंह मीणा की बेटी संजना मीणा, पूर्व विधायक हीरालाल दरांगी की बेटी अनीता दरांगी और कांग्रेस नेता विवेक कटारा चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं भाजपा से डॉ. चंद्रगुप्त सिंह चौहान, हिम्मत सिंह झाला, घनश्याम मेनारिया और कांग्रेस से लालसिंह झाला-राजसिंह झाला भी जिला परिषद के मैदान में हैं। इस बार उदयपुर सांसद मन्नलाल रावत की पत्नी रजनी पी रावत के भी जिला परिषद् सदस्य का चुनाव लड़ने की चर्चा थी, मगर ऐन मौके पर किन्ही कारणों से वे पीछे हट गई। कोटड़ा क्षेत्र से पूर्व प्रधान मुरारीलाल बुंबरिया, निर्मल गरासिया और पूर्व प्रधान सुगना देवी भी अपने परिवारों के साथ चुनाव लड़ रहे हैं। जिला प्रमुख की कुर्सी पर बड़े नेताओं की नजर इस बार उदयपुर जिला प्रमुख का पद अनारक्षित है। इसी कारण दोनों पार्टियों ने सामान्य और ओबीसी वार्डों में अपने वरिष्ठ नेताओं को उतारा है। भाजपा से पूर्व देहात जिलाध्यक्ष डॉ. चंद्रगुप्त सिंह चौहान (वार्ड 40) और हिम्मत सिंह झाला (वार्ड 37) मैदान में हैं। वहीं कांग्रेस से पूर्व जिलाध्यक्ष लालसिंह झाला (वार्ड 2) और युवा नेता राजसिंह झाला (वार्ड 32) चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा का बोर्ड बनने पर हिम्मत सिंह झाला, घनश्याम मेनारिया और डॉ. चंद्रगुप्त सिंह चौहान जिला प्रमुख पद की दौड़ में हैं। वहीं कांग्रेस का बोर्ड बनने की स्थिति में लालसिंह झाला और राजसिंह झाला प्रबल दावेदार हैं। वही, पूर्व जिलाध्यक्ष भंवरसिंह पंवार भी पंचायत समिति का चुनाव लड़ रहे हैं। मावली और गिर्वा में राजनीतिक परिवार आमने-सामने मावली के जिला परिषद वार्ड 43 में कांग्रेस विधायक पुष्करलाल डांगी के बेटे शांतिलाल डांगी के सामने भाजपा के पूर्व विधायक दलीचंद डांगी चुनाव लड़ रहे हैं। उधर, उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने अपनी बेटी संजना मीणा को वार्ड 28 से जिला परिषद में उतारा है। वहीं, दो बार विधानसभा चुनाव हार चुके कांग्रेस नेता विवेक कटारा अब प्रधान पद के लिए गिर्वा पंचायत समिति के वार्ड 4 (पडूणा) से सदस्य का चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले उनकी पत्नी सुखबीर और मां सज्जनदेवी भी यहां प्रधान रह चुकी हैं। मावली में विधायक प्रत्याशी रहे कृष्ण गोपाल पालीवाल के भाई की पत्नी सुशीला पालीवाल भी पंचायत समिति का चुनाव लड़ रही है। वे मावली में बोर्ड बनने की स्थिति में सुशीला प्रधान की प्रबल दावेदार है। पंचायत चुनाव के जरिए विधानसभा टिकट की तैयारी कई नेता आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी बनाए रखने के लिए भी पंचायत चुनाव लड़ रहे हैं। गोगुंदा से तीन बार विधानसभा चुनाव हार चुके पूर्व मंत्री मांगीलाल गरासिया अब प्रधान पद की उम्मीद में सायरा पंचायत समिति के वार्ड 9 से मैदान में हैं। सायरा में प्रधान पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है। वहीं झाड़ोल के पूर्व विधायक हीरालाल दरांगी की बेटी अनीता दरांगी फलासिया पंचायत समिति के वार्ड 12 से चुनाव लड़ रही हैं। इसी तरह वल्लभनगर में हिम्मत सिंह झाला और मावली में दलीचंद डांगी की उम्मीदवारी को भी क्षेत्र में सक्रिय रहने की रणनीति माना जा रहा है। आदिवासी अंचल में भी राजनीतिक परिवारों को टिकट जिला परिषद वार्ड 7 से भाजपा के पूर्व प्रधान मुरारीलाल बुंबरिया चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी पत्नी जीजा देवी सरपंच रह चुकी हैं और बेटा निर्भय इस बार सरपंच का चुनाव लड़ रहा है। वार्ड 8 से भाजपा प्रत्याशी निर्मल गरासिया खुद दो बार सरपंच रहे हैं। उनके पिता, भाई और पत्नी भी सरपंच रह चुके हैं और अब पत्नी ललिता देवी फिर से सरपंच का चुनाव लड़ रही हैं। उधर, कोटड़ा में कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी के ससुराल पक्ष से जुड़ीं पूर्व प्रधान सुगना देवी वार्ड 3 से और रिश्तेदार बाबूलाल लऊर शिक्षक पद से इस्तीफा देकर वार्ड 7 से पंचायत समिति का चुनाव लड़ रहे हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं में नाराजगी गांवों में पार्टी का काम करने और कार्यक्रमों में जाजम उठाने वाले कार्यकर्ताओं को पंचायत चुनाव में टिकट मिलने की उम्मीद थी। लेकिन बड़े नेताओं और उनके परिवारों को टिकट मिलने से कई छोटे कार्यकर्ता खफा हैं। कई क्षेत्रों में कार्यकर्ता मन से साथ नहीं होकर केवल साथ दिखने और प्रचार करने की औपचारिकता निभा रहे हैं।