उदयपुर में 2 करोड़ की रिश्वत मामले में गिरफ्तार हुए एसओजी के एडिशनल एसपी मुकेश सोनी और दलाल की जमानत याचिका पर सोमवार को कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों को सुनते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी पक्ष के वकील अशोक टांक ने दलील दी कि आरोपी मुकेश सोनी निर्दोष है, उन्हें झूठा फंसाया है। परिवादी ने खुद 272 प्लॉट घोटाला मामले में खुद को बचाने के लिए आरोपी के खिलाफ झूठी शिकायत दी। आरोपी दलाल सज्जनसिंह से मुकेश सोनी की कोई जान-पहचान नहीं है। वहीं, विशिष्ट लोक अभियोजक राजेश पारीक ने जमानत खारिज करने के लिए कोर्ट को बताया कि परिवादी से आरोपी सोनी व उसके दलाल की मुलाकात आरोपी की ही कार में हुई थी। इसकी पुष्टि सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स से होती है। आरोपी पुलिस अधिकारी है यदि उसे जमानत का लाभ ​दिया गया तो वह प्रकरण में अहम साक्ष्य से साथ छेड़छाड़ कर जांच प्रभावित कर सकता है। ASP ने जब्त किए सोने के जेवर जानबूझकर जब्तगी में नहीं बताए: परिवादी बहस के दौरान परिवादी निरंजन मोगरा ने कोर्ट में बताया- आरोपी मुकेश सोनी ने जब्त किए सोने के जेवर और जमीन के दस्तावेज जानबूझकर जब्तगी में नहीं दर्शाए। आज भी जेवरात और दस्तावेज आरोपी के पास है। परिवादी ने बताया कि उसके घर से जब्त किए सोने के जेवर, कागजात लौटाने और केस में राहत देने की एवज में ही दलाल सज्जनसिंह के मार्फत मुकेश सोनी ने उससे रिश्वत मांगी थी। आरोपी खुद मुझसे रिश्वत की डील करने रानी रोड आया। वह पुलिस अधिकारी होने से कानून की बारीकियों से वाकिफ था। इसलिए सामने मुंह से एक भी शब्द नहीं बोला और अपने मोबाइल में 2 करोड की रिश्वत देने के लिए लिखा था।