वर्तमान वर्षा ऋतु में पिछोला और फतहसागर झील में पानी की आवक नगण्य रहने के कारण उदयपुर शहर की झीलों में जल की आवक बढ़ाने के उद्देश्य से आज शाम 5:30 बजे देवास प्रथम एवं देवास द्वितीय परियोजना के बांधों के गेट खोले गए। जल प्रवाह के लिए मादड़ी बांध एवं देवास प्रथम के गेट 2 फीट 6 इंच खोले गए। दोनों बांधों से लगभग 750 क्यूसेक पानी प्रवाहित होकर सीसारमा नदी होते हुए पिछोला-स्वरूपसागर झील में पहुंचेगा। जल संसाधन विभाग के अनुसार जल आवक से पिछोला-स्वरूपसागर का गेज लगभग 8 फीट 4 इंच तक पहुंच जाएगा। खाली झीलों को भरने के लिए लिया फैसला जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता की ओर से 13 सितंबर को भेजे गए पत्र के बाद जल संसाधन विभाग ने इस संबंध में निर्णय लिया। इसके तहत देवास प्रथम व द्वितीय के आकोदड़ा और मादड़ी बांध में उपलब्ध पानी को पिछोला और फतहसागर झील में अपवर्तित करने के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग से वार्ता के बाद आज की तारीख तय कर गेट खोले गए। इससे पहले पानी को छोड़ने के दौरान सीसारमा नदी और नांदेश्वर टैंक के बहाव क्षेत्र में जल प्रवाह बढ़ने की स्थिति को देखते हुए संबंधित क्षेत्र के लोगों को नदी-नालों से दूर रहने की चेतावनी दी गई है। पेयजल संकट टालने देवास के बांधों से छोड़ा पानी दरअसल, झीलों का जलस्तर नहीं बढ़ने से जलापूर्ति के लिए पानी का संकट होने की स्थिति होने लगी है इससे पहले ही पीएचईडी और जल संसाधन विभाग ने मिलकर यह तकनीकी प्लान तैयार किया है। देवास परियोजना के बांधों में अभी पर्याप्त पानी उपलब्ध है, जिसे टनल के जरिए झीलों की ओर मोड़ा जाएगा। उदयपुर की झीलें यहां के पर्यटन जगत और आम जनता में खुशी की लहर है। खाली होती झीलों को देखकर होटल व्यवसायी और बोटिंग संचालक चिंतित थे, क्योंकि पर्यटन पूरी तरह झीलों की खूबसूरती पर टिका है। अब लबालब झीलें देशी-विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर खींचेंगी, जिससे स्थानीय बाजार और रोजगार को भी बड़ा बूस्ट मिलेगा। अब दीपावली पर टूरिज्म सीजन की भी तैयारियां है। दीपावली के बाद से गुजराती टूरिस्ट बड़ी संख्या में यहां रहते है।