पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा पर शिक्षा मंत्री रहते रीट में धांधली करवाने और सत्ता का मिसयूज कर बेटे, बहू और रिश्तेदारों को RAS इंटरव्यू में 80-80 नंबर दिलावाने के आरोप लगाए। विश्वेंद्र सिंह ने लिखा फेसबुक पर लिखा- ऐसे भ्रष्ट नेताओं को तत्काल अपना इस्तीफा दे देना चाहिए या कांग्रेस पार्टी के आलाकमान को इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करके पार्टी से निकाल देना चाहिए। विश्वेंद्र सिंह ने लिखा- डोटासरा की पुत्रवधू प्रतिभा पूनिया और पुत्रवधू के भाई गौरव पूनिया, बहन प्रज्ञा पूनिया और सभी रिश्तेदारों को इंटरव्यू में 80-80 अंक दिए गए। प्रतिभा पूनिया RAS-2016 में चयनित हुई, गौरव पूनिया, प्रज्ञा पूनिया 2018 में चयनित हुए। सत्ता का दुरुपयोग करके इंटरव्यू में नंबर दिलाए गए, सभी के समान नंबर आना संदेह पैदा करता है। साथ ही डोटासरा के पुत्र अविनाश सिंह का 2016 में RAS में चयन हुआ, उसमें OBC सर्टिफिकेट नॉन क्रीमीलेयर का बनवाकर लाभ लिया गया। विश्वेंद्र सिंह ने लिखा- डोटासरा के समधी रमेश चंद पूनिया के क्रीमीलेयर होते हुए उनके बच्चों को OBC का लाभ दिलाया गया। इन सब की गहनता से जांच होनी चाहिए। डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहते हुए REET परीक्षा में बड़ी धांधली हुई। जिससे गरीब किसानों के मेहनती बच्चों का भविष्य गर्त में धकेल दिया गया। मैं वर्तमान सरकार और मुख्यमंत्री से निवेदन करता हूं कि डोटासर के विरुद्ध गहनता से जांच कर कार्रवाई करें जिससे कि युवाओं का भरोसा सरकार के प्रति कायम रहे। निकाय चुनाव में हार के लिए डोटासरा को बताया जिम्मेदार शहरी निकाय चुनाव में भरतपुर और डीग जिले में कांग्रेस का एक भी बोर्ड नहीं पर विश्वेंद्र सिंह ने हार के लिए डोटासरा और भरतपुर जिलाध्यक्ष दिनेश सूपा व डीग जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा- प्रदेश अध्यक्ष मूक-बधिर बना बैठा है। इस बार जनता दोनों जिलाध्यक्षों और डोटासरा को कब्र में दफनाने को तैयार है। विश्वेंद्र ने डोटासरा को भरतपुर आने की भी चुनौती दी है। विश्वेंद्र सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा- डोटासरा कभी भरतपुर आने की हिमाकत करके देख लें, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान से भी अच्छा स्वागत करूंगा। विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा के भरतपुर आने पर डॉ. चंद्रभान जैसा स्वागत करने की बात कहकर 2013 के विवाद की यादों को ताजा कर दिया है। अब पढ़िए- पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने क्या कहा… कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर चहेतों को टिकट बांटा विश्वेंद्र सिंह ने फेसबुक पोस्ट पर लिखा- भरतपुर-डीग कांग्रेस का बंटाधार, जिम्मेदार कौन? नगर निकाय में कांग्रेस की हार का एक ही कारण है- दोनों जिलाध्यक्षों ने चहेतों को टिकट बांटे और असली कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया। जनता ने सबक सिखा दिया। पहले निकाय चुनावों में जनता को इन लोगों ने कब्र में दफनाया था, लेकिन जनता भी तैयार बैठी है। इस बार चुनाव में जनता इन दोनों जिलाध्यक्षों और इनको बचाने वाले प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को उसी कब्र में दफनाने के लिए तैयार है। विश्वेंद्र बोले- डोटासरा ने कहा था भरतपुर के लोग रास्ता पूछने के भी पैसे मांग लेते हैं विश्वेंद्र सिंह ने फेसबुक पोस्ट के बाद दैनिक भास्कर से फोन पर बातचीत में कहा- मैंने सोच-समझकर लिखा है। फिर कह रहा हूं, दोनों जिलाध्यक्षों ने भरतपुर-डीग में कांग्रेस को डुबो दिया, इसके लिए डोटासरा जिम्मेदार है। भरतपुर के लोगों के बारे में डोटासरा की सोच कैसी है, इसकी बानगी बताता हूं। एक बार डोटासरा ने भरतपुर के लोगों के बारे में कहा था कि भरतपुर के लोग तो ऐसे होते हैं कि रास्ता पूछने के भी पैसे मांग लेते हैं। गलतफहमी न पालें, मैं कहीं नहीं जा रहा विश्वेंद्र सिंह ने दैनिक भास्कर से कहा- मैं पार्टी हित के लिए यह सब बोल रहा हूं। भरतपुर-डीग में कांग्रेस की हार के लिए ये जिम्मेदार हैं, यहां पार्टी मजबूत होनी चाहिए। कोई यह गलतफहमी नहीं पाले कि मैं बीजेपी में जा रहा हूं। मैं कहीं नहीं जा रहा, मैं कांग्रेस में ही रहूंगा और पार्टी की मजबूती के लिए आवाज उठाता रहूंगा। हार का मुझे दुख हुआ, इसलिए यह सब बोल रहा हूं। पूर्व मंत्री ने ऐसे वक्त पर तीनों को निशाने पर लिया है, जब पंचायतीराज चुनाव होने वाले हैं। राजनीतिक जानकार इसके पीछे हार से ज्यादा कांग्रेस की खेमेबंदी और आपसी खींचतान असली कारण मान रहे हैं। कांग्रेस में डोटासरा विरोधी खेमा सक्रिय है, ताजा घटनाक्रम को भी उसी से जोड़कर देखा जा रहा है।