गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंगलवार को नई दिल्ली में किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना के लिए 6 राज्यों के बीच एमओयू हुआ। जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। किशाऊ बांध से राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के सीकर, चूरू और झुंझुनूं को हर साल 124 एमसीएम यानी 12.40 अरब लीटर पानी मिलेगा। यह पानी यमुना जल प्रोजेक्ट की तीन भूमिगत पाइपलाइन प्रणालियों के जरिए हांसियावास होते हुए चूरू तक पहुंचाया जाएगा। इसका उपयोग पेयजल, सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए किया जा सकेगा। इससे शेखावाटी में पेयजल उपलब्धता बढ़ने के साथ सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। 15 हजार करोड़ की परियोजना, 660 मेगावाट बिजली भी बनेगी किशाऊ परियोजना यमुना की प्रमुख सहायक टोंस नदी पर उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा पर प्रस्तावित है। 15 हजार करोड़ की इस परियोजना से 660 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होगा। राजस्थान को मिलेगा हिस्से का पूरा 124 एमसीएम पानी 1994 के यमुना जल समझौते के तहत राजस्थान को 124 एमसीएम पानी आवंटित है। केंद्र ने किशाऊ परियोजना को राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में शामिल किया है। परियोजना का निर्माण और संचालन हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड की ओर से गठित किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड करेगा, जबकि निगरानी अपर यमुना रिवर बोर्ड करेगा। किशाऊ बांध से हिमाचल प्रदेश के हिस्से के 95% पानी में से दिल्ली और राजस्थान को 75:25 के अनुपात में पानी मिलेगा। हिमाचल प्रदेश के लिए 5% पानी स्थानीय उपयोग के लिए सुरक्षित रहेगा। राजस्थान और हरियाणा के बीच परियोजना के क्रियान्वयन एवं संचालन के लिए 29 जून 2026 को एमओयू हो चुका है। 4 बड़े जल समझौतों से राजस्थान के पानी का दायरा बढ़ा राज्य सरकार ने किशाऊ समझौते को यमुना जल समझौते, रामजल सेतु लिंक परियोजना और नर्मदा जल समझौते के बाद राजस्थान के लिए चौथी बड़ी जल उपलब्धि बताया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया।