अलवर के टहला में 2500 बीघा सरकारी जमीन आवंटन के मामले में सरकार की मंजूरी मिलने के 1 साल बाद भी एसीबी गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई नहीं कर रही। मामले में दो बार जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद भी एफआईआर नहीं की गई। इनमें स्थानीय विधायक कान्ति प्रसाद मीणा के अलावा एसडीएम केशव कुमार, तहसीलदार व पटवारी तक करीब 40 कर्मचारियों को आरोपी माना है। उधर, अलवर जिला प्रशासन, राजस्व मंडल व कार्मिक विभाग अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी पूरी नहीं कर पाया है। इसका फायदा वे आवंटी उठा रहे हैं, जिनके नाम जमीन की गई थी। आवंटन रद्द होने के बाद भी मौके पर काबिज 63 लोगों ने सरकार के खिलाफ राजस्व मंडल में अपील की है। सम्भागीय आयुक्त से अपील खारिज होने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है। राजस्व मंडल में दायर निगरानी याचिकाओं में कलेक्टर अलवर, अतिरिक्त कलेक्टर, उपखंड अधिकारी राजगढ़ और भू-आवंटन सलाहकार समिति राजगढ़ पक्षकार हैं। सरकार इन मामलों में अपना पक्ष रखेगी। अधिकतर मामले अलवर जिले के टहला तहसील में रूपबास, घाटड़ा, तालाब, गोलाकाबास, राजड़ौली, नांगलदासा, पावटा, बिरकड़ी, भानगढ़, बलदेवगढ़, धीरोड़ा, लोसल, खोह और गोरधनपुरा क्षेत्र से जुड़े हैं। प्रशासन गांवों संग शिविर के दौरान कांग्रेस राज में हुए इन 803 आवंटन को तत्कालीन कलक्टर जितेन्द्र सोनी ने खारिज कर दिया था। मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे, लेकिन इस सम्बन्ध में जांच नहीं कराई गई। स्थानीय लोगों ने पहले एसओजी में मामले की शिकायत की थी। एसओजी ने पड़ताल कर मामला एसीबी का मानते हुए सभी शिकायतें वहां भेज दी। एसओजी के पत्र के अलावा अन्य माध्यम से एसीबी को भी शिकायतें मिली थी। इनकी जांच के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मांगी गई थी। पीसी एक्ट की धारा 17 (ए) के तहत एसडीएम केशव कुमार व अन्य के खिलाफ जून 2025 में मंजूरी मिली। मामले में दो बार जांच रिपोर्ट आने के बाद भी एसीबी अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे। उधर, तत्कालीन एसडीएम केशव कुमार ने आरोप निराधार बताए हैं। कहा है कि जांच रिपोर्ट की जानकारी नहीं है, लेकिन मेरे समय किए सभी आवंटन नियमानुसार हैं। इतने आवंटन निरस्त होने के बाद भी किसी भी लाभार्थी ने भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगाए। पहाड़, नदी व राडा भूमि के आवंटन की बात भी गलत है। जिले से लेकर सरकार तक कार्रवाई लम्बित एसडीएम केशव कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कर्मिक विभाग तथा तत्कालीन तहसीलदार बाबूलाल मीणा का मामला राजस्व मंडल में विचाराधीन है। इसी तरह तहसील के अन्य अधिकारी कर्मचारियों के मामले अलवर जिला प्रशासन में लम्बित हैं। मामले में एसडीएम के खिलाफ ही 17 (ए) के तहत सरकार से मंजूरी मिली है। वर्तमान स्थिति में क्या कार्रवाई हो सकती है इसपर कानूनी पहलू देखा जा रहा है। -गोविंद गुप्ता, डीजी एसीबी