प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव 9 व 11 सितंबर को होंगे। उदयपुर नगर निगम चुनाव के लिए मतदान 11 सितंबर को होगा। इस बार 85 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं को होम वोटिंग (घर बैठे मतदान) की सुविधा नहीं मिलेगी। विधानसभा चुनाव 2023 और लोकसभा चुनाव 2024 में भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 85 साल से ज्यादा उम्र के अति वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों को घर-घर जाकर वोट डलवाने की व्यवस्था की थी। अब निकाय चुनाव करा रहा राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) यह सुविधा नहीं दे रहा है। एसईसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भारत निर्वाचन आयोग आर्थिक रूप से सशक्त है। उसके पास विशाल बजटीय आवंटन व प्रशासनिक संसाधन हैं। इसके उलट राज्य आयोग के पास सीमित वित्तीय संसाधन व मैनपावर हैं। होम वोटिंग के लिए अलग से पोलिंग टीमों का गठन, माइक्रो ऑब्जर्वर, वीडियोग्राफी व वाहनों का भारी-भरकम खर्च आता है। यही वजह है कि राज्य आयोग ने इस व्यवस्था को निकाय चुनावों में लागू नहीं किया है। अब उदयपुर जिले की 6 निकायों में पंजीकृत 85 पार के 4,185 बुजुर्ग और 1,304 दिव्यांग मतदाताओं को अपने मताधिकार का उपयोग करने के लिए खुद ही मतदान केंद्रों तक पहुंचना होगा। दलील- वार्डों में खर्च संभालना चुनौती, पर बुजुर्गों की तकलीफ का क्या भारत निर्वाचन आयोग जब विधानसभा या लोकसभा चुनाव कराता है, तो केंद्र और राज्य सरकार की ओर से व्यापक चुनावी बजट स्वीकृत होता है। होम वोटिंग प्रक्रिया में हर एक बुजुर्ग या दिव्यांग मतदाता के घर 2 मतदान अधिकारी, 1 सूक्ष्म पर्यवेक्षक (माइक्रो ऑब्जर्वर), वीडियोग्राफर और सुरक्षाकर्मी का पूरा अमला जाता है। इसके विपरीत, नगरीय निकायों के चुनाव में राज्य सरकार से सीमित बजट मिलता है। जिले की 6 निकायों के 190 वार्डों में 5,489 बुजुर्ग व दिव्यांग मतदाता फैले हुए हैं। यदि इनके लिए अलग से होम वोटिंग रूट तय किए जाएं, तो वाहनों के ईंधन, मानदेय और वीडियोग्राफी का बजट कई गुना बढ़ जाता है। संसाधनों की इसी तंगी के चलते राज्य आयोग ने पूरी तरह बूथ आधारित मतदान की पारंपरिक व्यवस्था पर ही भरोसा जताया है।