राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दो प्रमुख आस्था स्थलों की कुल 5 हजार 209.72 बीघा ओरण भूमि को औपचारिक रूप से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया गया है। इसके अंतर्गत मोकला स्थित लोक देवता डूंगरपीर जी ओरण के लिए 3 हजार 889.37 बीघा भूमि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज की गई। मोहनगढ़ स्थित प्रसिद्ध श्री पन्नोधराय माता ओरण के लिए 1 हजार 320.35 बीघा भूमि को आधिकारिक रूप से ओरण के रूप में दर्ज किया गया। पश्चिमी राजस्थान में ओरण भूमि केवल चरागाह नहीं, बल्कि सदियों से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र, दुर्लभ वनस्पति और वन्यजीवों के संरक्षण का मुख्य केंद्र रही है। राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने से इन पवित्र भूमियों पर अवैध अतिक्रमण और अनधिकृत कब्जों की संभावनाओं पर पूरी तरह लगाम लगेगी। विधायक छोटूसिंह भाटी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का हार्दिक आभार जताया।