नगर निकाय चुनाव में भले ही सीधा मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के बीच हो, लेकिन मैदान में उतरे थर्ड फ्रंट के पांच प्रमुख दल दोनों पार्टियों के वोटों का गणित बिगाड़ने की स्थिति में हैं। आम आदमी पार्टी (आप), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी ), एआईएमआईएम और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने अपने प्रभाव वाले इलाकों में उम्मीदवार उतारकर चुनाव को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बना दिया है। बड़े शहरों में ‘आप’ ने स्थानीय चुनावों में दांव लगाया है। वहीं भरतपुर व धौलपुर सहित पूर्वी राजस्थान में बसपा ने अपने परंपरागत वोट बैंक को आधार बनाया है। वहीं वागड़ के आदिवासी बेल्ट में बीएपी ने पहली बार नगर निकाय चुनावों में अपने प्रत्याशी उतार कर कांग्रेस व भाजपा की मुश्किल बढ़ा दी है। मुस्लिम बहुल वार्डों में एआईएमआईएम की एंट्री से कांग्रेस की दिक्कत बढ़ी है। वहीं जाट बहुल इलाकों में आरएलपी ने दोनों प्रमुख दलों को चुनौती दी है। जयपुर में हुई एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद असदुद्दीन ओवैसी और आरएलपी सुप्रीमो व सांसद हनुमान बेनीवाल की संयुक्त जनसभा ने नए चुनावी समीकरण बने हैं। जाट बहुल में RLP समीकरण बदल रही
आरएलपी जाट बहुल वार्डों में समीकरण बदल रही है। इससे जयपुर शहर में भाजपा, जबकि जयपुर देहात, नागौर और शेखावाटी में कांग्रेस के वोट प्रभावित हो सकते हैं। तेजल सुपर डांस जैसे डिजिटल प्रचार और हनुमान बेनीवाल की ‘न्याय योद्धा’ वाली छवि के सहारे पार्टी युवा वोटरों को साधने में जुटी है। आदिवासी इलाकों में बीएपी बड़ी चुनौती
बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ में पहली बार बीएपी के उम्मीदवार मैदान में हैं। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बीएपी दोनों प्रमुख दलों के वोटों को प्रभावित कर सकती है। पार्टी ने आधे से ज्यादा टिकट मुस्लिम समुदाय को दिए हैं। दलित वोट बैंक के भरोसे बसपा
बसपा का भरोसा पारंपरिक दलित वोट बैंक पर है। पार्टी ने पूर्वी राजस्थान के अधिकांश निकायों में प्रत्याशी उतारे हैं। प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी प्रत्याशी मैदान में हैं। करीबी मुकाबले वाले वार्डों में बसपा को मिलने वाला वोट कांग्रेस और भाजपा, दोनों के समीकरण बिगाड़ सकता है। AIMIM की एंट्री से कांग्रेस परेशान
निकाय चुनाव में एआईएमआईएम की एंट्री ने कांग्रेस प्रत्याशियों की मुसीबत बढ़ा दी है। मुस्लिम बहुल वार्डों में पार्टी ने प्रत्याशी उतारे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद असदुद्दीन ओवैसी की सभाओं के बाद जयपुर के आदर्श नगर और किशनपोल में कांग्रेस के लिए चुनौती बन रही है। शहरी सीटों पर आप की मौजूदगी भाजपा के वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है
आप ने जयपुर, कोटा, अजमेर, जोधपुर और उदयपुर में उम्मीदवार उतारे हैं। मध्यम वर्ग और जेन-जी को आकर्षित करने के लिए पार्टी स्थानीय मुद्दों के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलनों को भी प्रचार का हिस्सा बना रही है। शहरी सीटों पर आप की मौजूदगी भाजपा के वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है।