आगरा में गुरुवार सुबह रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ते समय हुए हादसे में खींवसर क्षेत्र के आकला निवासी एयरफोर्स जवान नैनाराम गोरछिया की जान चली गई। शुक्रवार को जवान की पार्थिव देह आगरा से खींवसर थाने पहुंचीं, जहां से तिरंगा यात्रा की शुरूआत हुई। करीब 5 किलोमीटर लंबी तिरंगा में ग्रामीण और जवान के परिजन शामिल हुए। इसके बाद पैतृक गांव पहुंची, जहां पार्थिव देह को देखते ही परिजन बिलख पड़े और ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गई। नैनाराम गोरछिया भारतीय वायुसेना में कॉरपोरल (CPL) के पद पर कार्यरत थे। वे करीब 13 सालों से वायुसेना में सेवाएं दे रहे थे। वर्तमान में उनकी तैनाती प्रयागराज में थी। ड्यूटी पर लौटते समय आगरा में हुआ हादसा परिजनों के अनुसार, नैनाराम छुट्टी पर गांव आए हुए थे। 9 सितंबर की शाम वे ड्यूटी पर लौटने के लिए घर से निकले थे। आगरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ते समय अचानक उनका पैर फिसल गया। इसी दौरान वे ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसे में नैनाराम की जान चली गई गई। आगरा में पोस्टमॉर्टम के बाद उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव आकला लाया गया। खींवसर पहुंचने पर लोगों ने नम आंखों से जवान को अंतिम विदाई दी। हंसमुख स्वभाव के थे, गांव के विकास की करते थे चर्चा परिवार के सदस्य रामपाल सियाग ने बताया- नैनाराम हंसमुख स्वभाव के थे। जब भी छुट्टी पर गांव आते तो सभी के साथ समय बिताते थे। गांव के विकास और बच्चों की शिक्षा को लेकर अक्सर चर्चा करते थे। वे गांव के बच्चों को सरकारी नौकरी की तैयारी करने के लिए प्रेरित करते थे। साथ ही युवाओं को देश सेवा के लिए आगे आने की सीख देते थे। नैनाराम के 5 भाई है। इनमें नैनाराम चौथे नंबर के थे। परिवार में नैनाराम के अलावा सभी खेती-किसानी से जुड़े हैं। परिवार में 2 नाबालिग बच्चे नैनाराम के एक बेटा भावेश और एक बेटी निकिता है। दोनों नाबालिग हैं। पिता की मौत से दोनों बच्चों सहित पूरा परिवार सदमे में है। करीब 13 सालों तक देश की सेवा करने वाले जवान के निधन से आकला सहित पूरे खींवसर क्षेत्र में गम का माहौल है। ग्रामीणों ने नैनाराम को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने देश सेवा में अपना जीवन समर्पित किया।