अलवर में नगर निकाय चुनाव के लिए बुधवार को मतदान होना है। शहर की हॉट सीट वार्ड 39 और 27 खास चर्चा में हैं। दोनों ही वार्डों में कांग्रेस के बड़े नेताओं की पत्नियां चुनाव मैदान में हैं। वहीं वार्ड नंबर 1 में भाजपा-कांग्रेस के साथ बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। मतदान से ठीक एक दिन पहले दैनिक भास्कर शहर के तीनों वार्डों में पहुंचा और लोगों से बातचीत कर चुनावी माहौल, स्थानीय मुद्दे और प्रत्याशियों को लेकर मतदाताओं का मूड जाना। मतदाताओं ने कहा कि वोट मांगने के समय सबको याद आती है, लेकिन जनता को सीवर लाइन और नाली की व्यवस्था चाहिए। एक महिला ने कहा कि अब किसी प्रत्याशी पर आसानी से विश्वास नहीं होता। यह भी तय नहीं है कि वोट देने जाएगी या नहीं। वार्ड 39 और 27 में भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला दिखाई दे रहा है, लेकिन स्थानीय समस्याएं प्रत्याशियों के लिए चुनौती हैं। वहीं वार्ड 1 में बागी प्रत्याशियों ने चुनाव को त्रिकोणीय नहीं बल्कि बहुकोणीय बना दिया है। अब अंतिम फैसला जनता के वोट से होगा और मतदान के बाद ही साफ होगा कि स्थानीय मुद्दे भारी पड़े या पार्टी और प्रत्याशी का प्रभाव। निगम की दो हॉट सीट के वोटर्स ने क्या कहा, पढ़िए- वार्ड 39: कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष की पत्नी बनाम भाजपा प्रत्याशी वार्ड नंबर 39 में कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष योगेश मिश्रा की पत्नी कमलेश शर्मा कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ रही हैं। उनके सामने भाजपा की अपूर्णा शर्मा हैं। वार्ड में दोनों के बीच सीधी और कड़ी टक्कर मानी जा रही है। हालांकि कुछ इलाकों में नाली और सीवर की समस्या के कारण दोनों प्रमुख प्रत्याशियों को जनता की नाराजगी का सामना भी करना पड़ रहा है। निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में हैं, लेकिन मोहल्लों में बातचीत के दौरान मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही दिखाई दिया। नाली नहीं होने से सड़क पर भरता पानी वार्ड की रहने वाली यशोदा शर्मा ने कहा कि कॉलोनी में नाली नहीं होने के कारण बारिश और घरों का पानी सड़क पर भर जाता है। इससे बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। उनका कहना है कि चुनाव के समय सभी प्रत्याशी वादे करते हैं, लेकिन बाद में कोई सुनवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि वोट मांगने के समय सबको याद आती है, लेकिन जनता को सीवर लाइन और नाली की व्यवस्था चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि अब किसी प्रत्याशी पर आसानी से विश्वास नहीं होता और यह भी तय नहीं कि वोट देने जाएगी या नहीं। इसी वार्ड के टिंकू ने कहा कि यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है। वहीं जनता कॉलोनी की शीला शर्मा ने बताया कि उनका मकान सड़क से नीचे है और बारिश के दौरान घर में पानी भर जाता है। इसके कारण पड़ोसियों से विवाद तक की स्थिति बन जाती है। उनका कहना है कि चुनाव में कोई भी आए, लेकिन नाली और पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए। वार्ड 27: कांग्रेस के शहर अध्यक्ष की पत्नी मैदान में वार्ड नंबर 27 में कांग्रेस के शहर अध्यक्ष रमन सैनी की पत्नी पिंकी रानी चुनाव मैदान में हैं। उनके सामने भाजपा की ममता कंवर हैं। यहां भी मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच आमने-सामने का बना हुआ है। हालांकि कुछ इलाकों की समस्याएं कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकती हैं। बारेठ छात्रावास के पास वाले मोहल्ले में नाली तो बनी हुई है, लेकिन उसका उचित निकास नहीं होने से स्थानीय लोग परेशान हैं। इस समस्या को लेकर कुछ मतदाताओं में रमन सैनी के प्रति नाराजगी भी दिखाई दी। इसके बावजूद वार्ड में कांग्रेस का पुराना प्रभाव और भाजपा प्रत्याशी की मजबूती के कारण मुकाबला बराबरी का माना जा रहा है। वार्ड निवासी नलव शर्मा ने कहा कि यहां निर्दलीय प्रत्याशियों की कोई खास स्थिति नहीं है और मुख्य मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के बीच ही है। उन्होंने कहा कि रमन सैनी इस वार्ड से पहले भी चुनाव जीतते रहे हैं और इस बार उनकी पत्नी मैदान में हैं। दूसरी ओर ममता कंवर भी मजबूत प्रत्याशी हैं, इसलिए इस बार मुकाबला कड़ा है। वार्ड 1: बागियों ने बिगाड़ा भाजपा-कांग्रेस का गणित वार्ड नंबर 1 में मुकाबला सबसे ज्यादा उलझा हुआ नजर आ रहा है। यहां भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के साथ तीन निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं। खास बात यह है कि दोनों प्रमुख दलों से टिकट नहीं मिलने के बाद बागी प्रत्याशियों ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं। कांग्रेस से महेंद्र राठी और भाजपा से पंकज शर्मा चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद हेमंत मित्तल और पवन सिंह निर्दलीय मैदान में हैं। स्थानीय स्तर पर माना जा रहा है कि हेमंत मित्तल भाजपा के मजबूत माने जाने वाले इलाके में और पवन सिंह दूसरे हिस्से में भाजपा के वोटों में सेंध लगा सकते हैं। वहीं कांग्रेस के बागी राशिद खान भी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के परंपरागत मुस्लिम वोटों में सेंध लगने की संभावना ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। वार्ड निवासी नेमीचंद के मुताबिक यहां मुकाबला पांच कोणों में बंटा हुआ है। निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी के कारण अंतिम समय तक यह साफ नहीं है कि किसके पक्ष में वोटों का ध्रुवीकरण होगा। ऐसे में वार्ड 1 में बागी प्रत्याशी दोनों प्रमुख दलों के उम्मीदवारों का चुनावी गणित बिगाड़ सकते हैं।