भारत-पाकिस्तान सीमा के पास जैसलमेर में भारतीय सेना की वैलिएंट विंग्स स्क्वाड्रन ने एएच-64ई अपाचे अटैक हेलिकॉप्टरों की मारक क्षमता का सफल परीक्षण किया। युद्धाभ्यास के दौरान पायलट ने अपाचे में लगी इन-बिल्ट 30 एमएम चेन गन से हवा में उड़ रहे बंशी जेट 40 प्लस मानवरहित ड्रोन को पलक झपकते ही तबाह कर दिया। पायलट के टारगेट लॉक करते ही गन से निकली गोलियों ने दुश्मन के छद्म ड्रोन को हवा में ही खत्म कर दिया। इस परीक्षण का प्राथमिक उद्देश्य आधुनिक युद्ध क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे ड्रोन खतरे से निपटना था। मिडिल ईस्ट और आधुनिक युद्धों के अनुभवों से सबक लेते हुए भारतीय सेना अब अपने लड़ाकू हेलिकॉप्टरों की भूमिका का विस्तार कर रही है। अब ये हेलिकॉप्टर केवल जमीनी टैंकों व बंकरों को नष्ट करने तक सीमित नहीं रहेंगे। ये हवा में उड़ते आत्मघाती ड्रोन को भी मार गिराएंगे। इसके लिए अमेरिका-निर्मित अपाचे और स्वदेशी रूप से विकसित प्रचंड की घातक जोड़ी तैयार की जा रही है। पश्चिमी सीमा पर अभेद्य पहरा वैलिएंट विंग्स आर्मी एविएशन कॉर्प्स की पहली और बेहद आक्रामक अपाचे स्क्वाड्रन है। इसे थल सेना को स्वतंत्र हवाई मारक क्षमता देने के लिए गठित किया गया है। जोधपुर और जैसलमेर के खुले रेतीले, रणनीतिक इलाकों में तैनात यह स्क्वाड्रन रेगिस्तानी सीमा पर 24 घंटे सतर्क रहती है।