बारां जिले में खेतों में खाद का इस्तेमाल राष्ट्रीय औसत से करीब 5 गुना ज्यादा हो रहा है। इससे मिट्टी की सेहत पर संकट गहरा गया है। जिले की 3.50 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में हर साल ढाई लाख मीट्रिक टन खाद डलती है। यह प्रति हेक्टेयर औसतन 714 किलो है, जबकि राष्ट्रीय औसत 145 किलो प्रति हेक्टेयर है। खाद की मांग इतनी बढ़ी है कि 1960-61 में पूरे देश की खपत आज अकेले बारां में एक साल में होती है। किसान कम समय में ज्यादा उत्पादन के लिए जरूरत से ज्यादा यूरिया-रासायनिक खाद डाल रहे हैं। इसका असर मिट्टी पर दिख रहा है। कृषि अनुसंधान केंद्र अन्ता के वैज्ञानिक डॉ. बीएल शाह के अनुसार, ज्यादा रासायनिक खाद से गेहूं का दाना बड़ा दिखता है, पर प्रोटीन और आयरन घट रहा है। मिट्टी में जैविक कार्बन, केंचुए, जीवाणु कम हो रहे हैं।