नगर निगम उदयपुर के 80 वार्डों में मतदान पूरा होते ही शहर की भावी सरकार का सियासी अंकगणित स्पष्ट होने लगा है। दैनिक भास्कर के ग्राउंड सर्वे और बूथवार वोटिंग पैटर्न के आंकड़ों की पड़ताल पर हमने पाया कि भाजपा 48 से 56 सीटों (60% से 70% हिस्सा) पर बढ़त बनाकर आसानी से बहुमत का 41+ आंकड़ा पार करती दिख रही है। वहीं, कांग्रेस 18 से 24 वार्डों (22.5% से 30% हिस्सा) में बढ़त बनाए हुए हैं। कुल 80 वार्डों में से करीब 6 से 8 सीटें (7.5% से 10%) ऐसी हैं, जहां निर्दलीय और बागी प्रत्याशी जीत-हार का गणित बिगाड़ रहे हैं। इस चुनाव में 48 सीटों पर सीधी टक्कर, 24 सीटों पर स्थानीय सामाजिक समीकरणों का असर और 8 सीटों पर बागी प्रत्याशियों का सीधा प्रभाव दर्ज किया गया है। भाजपा को उसके 35+ परंपरागत शहरी-वैश्य-ब्राह्मण बहुल वार्डों और बूथ प्रबंधन का सीधा फायदा मिलता दिख रहा है। 8 वार्डों में 150 से कम वोट का मार्जिन आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि वार्ड 3, 8, 16, 43, 58, 62, 76 और 80 में हार-जीत का अंतर महज 50 से 150 वोटों के बेहद बारीक मार्जिन के बीच सिमट सकता है। विशेष रूप से वार्ड 5 और वार्ड 8 में कांग्रेस प्रत्याशी आगे निकलते दिख रहे हैं, जहां भाजपा प्रत्याशी उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं। कुल 80 में से 12 वार्ड ऐसे रहे जहां बागियों ने मुख्य दलों के 8% से 15% तक कैडर वोट काटे हैं। वार्ड 41 से 50 के क्लस्टर में आदिवासी, मेनारिया और ब्राह्मण मतदाताओं का लामबंदी डेटा दर्शाता है कि यहां मतदान प्रतिशत पिछले चुनाव की तुलना में 3-10% तक बढ़ा है, जिससे 3 सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति बन गई है। पॉश बेल्ट में 65% टर्नआउट से भाजपा को लाभ इस बार का सबसे बड़ा न्यू एंगल पॉश कॉलोनियों का साइलेंट वोटर रहा। वार्ड 51 से 60 के कमर्शियल व रेजिडेंशियल बेल्ट में 65% से अधिक बूथ टर्नआउट ने भाजपा के पक्ष में माहौल बनाया, जहां पार्टी का स्ट्राइक रेट 80% रहने का अनुमान है। वार्ड 53 में मतदान से 72 घंटे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और 200 कार्यकर्ताओं का भाजपा में शामिल होना गेम चेंजर साबित हुआ, जिसने 500 से अधिक कैडर वोटों का झुकाव बदल दिया। अल्पसंख्यक व दलित बाहुल्य 14 वार्डों में कांग्रेस का वोट शेयर 52% से अधिक रहने का अनुमान है। कुल मिलाकर, बूथ-स्तरीय लामबंदी ने भाजपा की जीत की राह आसान कर दी है।