नगर परिषद चुनाव के बीच मंगलवार को तुलसी साधना शिखर के महाप्रज्ञ हॉल में दैनिक भास्कर के ‘मेरा शहर-मेरा सवाल’ कार्यक्रम में चुनावी वादों से इतर शहर की असल समस्याओं पर सीधा संवाद हुआ। जनता ने भाजपा और कांग्रेस के नेताओं से सड़क, जलभराव, सफाई, स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण, अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार से जुड़े सवाल पूछे। नेताओं ने अपने-अपने बोर्ड के विकास का विजन और समस्याओं के समाधान का रोडमैप बताया। कार्यक्रम में भाजपा के पूर्व सभापति सुरेश पालीवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष मानसिंह बारहठ और धोईंदा के पूर्व पार्षद व प्रत्याशी चंपालाल कुमावत तथा कांग्रेस के पूर्व सभापति अशोक टांक, पूर्व चेयरमैन नारायणलाल सुथार और पूर्व पार्षद व प्रत्याशी हेमंत रजक मौजूद रहे। मतदाता बोले- ठेकेदार नहीं, पार्षद चुनते हैं; भ्रष्टाचार पर लगे लगाम नर्मदाशंकर पालीवाल ने सवाल किया कि पार्षद के ठेकेदार बनने से भ्रष्टाचार की स्थिति बन रही है। रावण दहन नहीं होने और सफाई व्यवस्था बिगड़ने का मुद्दा भी उठाया। कांग्रेस के अशोक टांक ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि रावण दहन का भुगतान रोका गया था, जबकि सफाई व्यवस्था में ऐसी स्थिति नहीं है। भाजपा के सुरेश पालीवाल ने कहा कि ऐसे मामलों में गड़बड़ी होती है। भाजपा बोर्ड बनने पर इसे रोकने का दावा किया। निवर्तमान कांग्रेस बोर्ड में ऐसा हो रहा है। गैस पाइपलाइन पर कार्रवाई को लेकर आमने-सामने हुए नेता: जनता ने पूछा कि गैस पाइपलाइन डालने के दौरान जगह-जगह सड़कें खोदी गईं, फिर कंपनी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कांग्रेस के अशोक टांक ने भाजपा सरकार पर कार्रवाई नहीं करने देने का आरोप लगाया। भाजपा के मानसिंह बारहठ ने पलटवार करते हुए कहा कि नगर के मुखिया कांग्रेस के हैं, कार्रवाई उन्हें करनी चाहिए। टांक ने जवाब में आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद गैस पाइपलाइन कंपनी से विधायक के स्तर पर सीएसआर फंड से 50 लाख रुपए का डोनेशन लेने का प्रयास हुआ और कार्रवाई नहीं होने दी गई। उन्होंने खारी फीडर नहर परियोजना में घटिया निर्माण और महाराणा राजसिंह की प्रतिमा स्थापना में स्वायत्त शासन विभाग की गाइडलाइन की पालना नहीं होने के भी आरोप लगाए। ‘हाथी नहीं, घोड़े की सवारी’- खुद चलाएंगे शहर की सरकार: महावीर नगर के वाहब खान ने सवाल किया कि परिषद बोर्ड हाथी की सवारी करे या घोड़े की। उनका आशय था कि हाथी को महावत चलाता है, जबकि घोड़ा खुद चलता है। दोनों पक्षों ने कहा कि शहर की सरकार वे स्वयं चलाएंगे और किसी ‘महावत’ को हावी नहीं होने देंगे। महाराणा राजसिंह की प्रतिमा पर सवाल, जवाब से बचते दिखे नेता: शहरवासियों ने नगर के संस्थापक महाराणा राजसिंह की प्रतिमा स्थापना को लेकर सवाल उठाया। पूछा कि बड़े वादों के बावजूद प्रतिमा रात के अंधेरे में क्यों लगानी पड़ी। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के नेता स्पष्ट जवाब देने के बजाय अपना-अपना पक्ष रखते नजर आए। तालेड़ी नदी का सीमांकन, कोटा की तर्ज पर रिवर फ्रंट की मांग: 100 फीट रोड निवासी भगवतीलाल पालीवाल ने कहा कि राजनगर से टीवीएस चौराहे तक तालेड़ी नदी का सीमांकन नहीं होने से पॉश कॉलोनियों में जलभराव और गंदगी की समस्या है। उन्होंने कोटा के चंबल रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकास की योजना पूछी। दोनों पक्षों ने समस्या स्वीकारते हुए बोर्ड बनने पर नदी का सीमांकन कराने और रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकास का आश्वासन दिया। राजसमंद झील की नौचौकी पाल के सौंदर्यीकरण से पर्यटन बढ़ाने की मांग भी उठी।