डीग शहर में लगे श्री जवाहर प्रदर्शनी एवं ब्रज यात्रा मेले में इस बार भीड़ कम रही। नगरीय निकाय चुनावों की आचार संहिता के कारण कुश्ती-दंगल और सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं हो पाए। हालांकि, जल महलों में रंगीन फव्वारे देखने के लिए देसी और विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंचे। शाम के समय जल महलों में रंग-बिरंगे फव्वारों का नजारा बेहद आकर्षक था। रोशनी के बीच पानी की अलग-अलग रंगों में बदलती धाराओं ने जल महलों की सुंदरता बढ़ा दी। पर्यटकों ने इन रंगीन फव्वारों को अपने कैमरों में भी कैद किया। इस बार कम भीड़ नजर आई हर साल श्री जवाहर प्रदर्शनी एवं ब्रज यात्रा मेले में कुश्ती-दंगल और सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्य आकर्षण होते हैं। इन्हें देखने के लिए आसपास के गांवों और कस्बों से बड़ी संख्या में लोग डीग आते हैं। मेले में दुकानें, मनोरंजन के साधन और अन्य गतिविधियां भी लोगों को आकर्षित करती हैं। इस बार आचार संहिता लागू होने के कारण ये प्रमुख आयोजन नहीं हुए। इन कार्यक्रमों के नहीं होने का असर मेले में आने वाली भीड़ पर साफ दिखा। आमतौर पर जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते थे, वहां इस बार कम भीड़ नजर आई। रंगीन फव्वारे लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे इसके बावजूद, जल महलों में लगे रंगीन फव्वारे लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। फव्वारों की रंगीन रोशनी और जल महलों की ऐतिहासिक खूबसूरती का मिलन देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे। शाम ढलते ही जल महलों के आसपास पर्यटकों की भीड़ बढ़ गई। देसी पर्यटकों के साथ विदेशी पर्यटकों ने भी इन फव्वारों का खूब आनंद लिया। कार्यक्रम नहीं होने से मेले का रंग पड़ा फीका स्थानीय लोगों का कहना है कि मेले की पहचान कुश्ती-दंगल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भी जुड़ी हुई है। इस बार आचार संहिता के कारण इन कार्यक्रमों का आयोजन नहीं होने से मेले में पहले जैसी रौनक नजर नहीं आई। दुकानदारों और मेले से जुड़े लोगों को भी इस बार कम भीड़ के कारण निराशा का सामना करना पड़ा। ऐसे में जल महलों में रंगीन फव्वारों के आयोजन ने मेले की रौनक को कुछ हद तक बनाए रखा, लेकिन कुश्ती-दंगल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अभाव में इस बार जवाहर मेले का रंग फीका ही नजर आया।