प्रदेश के नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में अब फायरमैन से बाबूगिरी नहीं कराई जा सकेगी। वहीं बिना जरूरी ट्रेनिंग, डिप्लोमा या सुरक्षा उपकरणों के किसी कार्मिक को सीधे आग बुझाने के जोखिम वाले काम में भी नहीं उतारा जाएगा। स्वायत्त शासन विभाग ने प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं को फायरमैन की तैनाती, प्रशिक्षण और सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। खास बात यह है कि सुरक्षा संसाधनों के बिना कर्मचारी को जोखिम वाले काम में लगाने पर हादसा होने की स्थिति में संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।सुरक्षा संसाधनों के बिना किसी कर्मचारी को जोखिम वाले काम में लगाया गया और हादसा हुआ तो संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। निकायों को अपने यहां फायरमैन की योग्यता, ट्रेनिंग, तैनाती, पीपीई किट और अन्य संसाधनों की तत्काल समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। यह निर्देश जोधपुर के बासनी में केमिकल फैक्ट्री में आग बुझाने के दौरान हुए हादसे के बाद जारी किए गए हैं। 23 सितंबर के हादसे में कई फायरकर्मी झुलसे थे और तीन फायर फाइटरों की मौत हुई थी। 1. बिना ट्रेनिंग डायरेक्ट फायर फाइटिंग नहीं निर्धारित फायर ट्रेनिंग, डिप्लोमा या जरूरी प्रमाण-पत्र नहीं रखने वाले कार्मिकों को सीधे आग बुझाने के काम में नहीं लगाया जाएगा। फायर फाइटिंग के लिए योग्य और प्रशिक्षित कर्मचारियों की ही तैनाती होगी। 2. प्रशिक्षित फायरमैन अब बाबूगिरी से मुक्त विभाग ने माना है कि कई निकायों में प्रशिक्षित और डिप्लोमाधारी फायरमैन से उनकी मूल अग्निशमन ड्यूटी के बजाय क्लर्क या अन्य गैर-अग्निशमन कार्य करवाए जा रहे हैं। ऐसे कार्मिकों को तत्काल फायर विभाग में उनकी मूल जिम्मेदारी पर लगाने के निर्देश दिए हैं। 3. पीपीई किट के बिना घटनास्थल पर नहीं भेजेंगे: हर फायरमैन को ड्यूटी पर भेजने से पहले आवश्यक पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) उपलब्ध कराना होगा। इसमें फायरप्रूफ सूट, हेलमेट, ग्लव्स, सेफ्टी शूज, सुरक्षात्मक चश्मा और फेस प्रोटेक्शन जैसे उपकरण शामिल हैं। 4. हादसा हुआ तो अफसर भी जवाबदेह सुरक्षा संसाधनों के बिना किसी कर्मचारी को जोखिम वाले काम में लगाया गया और हादसा या क्षति हुई तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।