राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी (राजमेस) के अंतर्गत खोले गए मेडिकल कॉलेजों में भविष्य के डॉक्टर तैयार करने के लिए न तो पर्याप्त फैकल्टी है, न ही क्लिनिकल प्रैक्टिस के लिए मैटेरियल। कुर्सी-टेबल के लिए भी स्टूडेंट को जूझना पड़ रहा है। टोंक और जैसलमेर मेडिकल कॉलेज में दो साल से यही हालात हैं। यहां 50-50 मेडिकल सीटें बढ़ाने के लिए दो साल से नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) को झूठे शपथ पत्र दिए जा रहे। नीट रिजल्ट के बाद काउंसलिंग चल रही है, उससे पहले एनएमसी ने सीटें बढ़ाने को लेकर दोनों मेडिकल कॉलेजों का दौरा किया तो झूठ सामने आ गया। कॉलेजों में फैकल्टी के लिए ही सुविधाएं नहीं हैं। एमएनसी ने 50 सीट बढ़ाने का आवेदन खारिज कर दिया। उधर, मौजूदा मेडिकल स्टूडेंट आए दिन कॉलेज प्रशासन से पढ़ाई व सुविधाओं को लेकर शिकायतें कर रहे हैं। कॉलेज प्रशासन मांगों को राजमेस को भेज रहा है, लेकिन दो साल से खरीद अटकी है। उधर कॉलेज प्रशासन को भी यह अधिकार नहीं है कि वो अपने स्तर पर इतनी बड़ी खरीद कर सके। फिलहाल फैकल्टी के लिए आवेदन निकाले गए हैं। इसमें भी खासकर जैसलमेर को लेकर रुझान नहीं दिखा। वहीं भावी डॉक्टरों को पढ़ाई की सुविधा के लिए राजमेस का सिस्टम पूरी तरह फेल साबित हो रहा है। टोंक : पहले बैच के लिए ही जुगाड़ से किताबें, केमिकल व उपकरण मंगाए टोंक मेडिकल कॉलेज में दूसरा बैच आ चुका है, लेकिन सुविधाओं का अभाव है। किताबें तक नहीं हैं। स्टूडेंट ने शिकायत की तो कॉलेज प्रशासन ने राजमेस को लिखा। उन्होंने अजमेर, जयपुर और कोटा मेडिकल कॉलेज को प्रेक्टिकल के लिए केमिकल्स, उपकरण (बीपी, माइक्रोस्कोप) और किताबें उपलब्ध कराने की सिफारिश की। जुगाड़ के सामान का कॉलेज के पास बिल नहीं था, जिसे एनएमसी टीम ने मांगा तो उपलब्ध नहीं करा पाए। जैसलमेर : सीएमएचओ से 20 बेड लिए तो बच्चे सो पा रहे, पाली से किताबें मंगवाईं पहले बैच के लिए 17 फैकल्टी ही है। एनॉटमी, फीजियो, बायोकेमिस्ट्री में एक भी नहीं। सेकंड ईयर के माइक्रो पैथो फार्मा के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं। हॉस्टल के लिए 50 बेड दान कराए गए। 20 बैड सीएमएचओ से लिए। पाली से 400 किताबें मंगवाई गईं। एनएमसी ने बिल मांगा, जो नहीं था। इधर, बाड़मेर कॉलेज से 20 लाख की खरीद होनी थी, उसमें से 9 लाख का ही काम हुआ। फैकल्टी के लिए आवेदन मांगते हैं, लेकिन लोग यहां आने से कतरा रहे। न पर्याप्त फैकल्टी, न इन्फ्रास्टक्चर... क्यों न आर्थिक दंड लगाएं : एनएमसी एनएमसी के 13 मई को जारी निर्देशों के मुताबिक मेडिकल कॉलेजों ने पोर्टल पर जानकारी दे दी। इसके बाद एनएमसी के ‘अंडर ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड’ के जरिए मूल्यांकन हुआ। इसमें स्वचालित पोर्टल ऑडिट, घोषणा पत्र, परीक्षा वीडियो रिकॉर्डिंग, मानक मूल्यांकन प्रपत्र जांच और एनएमसी के आधार पर तय बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली आदि शामिल थे। मूल्यांकन में मेडिकल कॉलेज में कई कमियां मिलीं। ऐसी स्थिति में कठोर कार्रवाइयों के साथ हर उल्लंघन पर एक करोड़ का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। आयोग के उप सचिव ने चेतावनी दी कि शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए एमबीबीएस प्रवेश के लिए सीटों में कमी क्यों नहीं की जाए? साथ ही कॉलेज पर आर्थिक दंड क्यों नहीं लगाया जाए।
राजमेस से सुविधाएं मांगी हैं कॉलेज में सुविधाओं के लिए राजमेस को लिखा है। फैकल्टी के लिए आवेदन मांगे है। एनएमसी से 100 सीट करने की मांग पर भी काम हो रहा है।
-डॉ लोकेंद्र शर्मा, प्रिंसिपल, टोंक मेडिकल कॉलेज दूर होने से कोई नहीं आना चाहता इन्फ्रास्टक्चर की कमी पर हम हमारी ओर से मांग करते आ रहे हैं। फैकल्टी दूरी के चलते आना नहीं चाह रही। उम्मीद है जल्द समाधान निकलेगा।
-डॉ. संजय चौधरी, प्रिंसिपल, जैसलमेर मेडिकल कॉलेज खरीद पर चुप्पी साध गए कमिश्नर टोंक, जैसलमेर मेडिकल कॉलेज में 100 सीटें करने का प्रयास है। रिक्रूटमेंट की मंजूरी दी है। हां, जैसलमेर कोई जाना नहीं चाहता। खरीद पर नो कमेंट।
-बाबूलाल गोयल, कमिश्नर, मेडिकल-एजुकेशन