केंद्र सरकार के जीएसटी नियमों की एक पेचीदगी चूरू जिले के बड़े और मझोले कारोबारियों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। जीएसटी कानून के नियम 86बी के तहत 50 लाख रुपए से अधिक का मासिक टर्नओवर वाले कारोबारियों को, भले ही उनके पास पर्याप्त इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) यानी पुराना टैक्स क्रेडिट मौजूद हो, अपनी टैक्स देयता का कम से कम 1% हिस्सा अनिवार्य रूप से नकद में चुकाना ही पड़ रहा है। जिले में विशेषकर चूरू शहर सहित सरदारशहर, सुजानगढ़, रतनगढ़ आदि ग्वार गम, चना, अनाज, कपड़ा, सर्राफा और स्टील-हार्डवेयर के बड़े व्यापारिक हब हैं। इसलिए जीएसटी नियम 86बी की यह मार यहां के व्यापारियों की वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है। सीए विनोद भार्गव ने बताया कि नियम 86बी मूल रूप से फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी रोकने के लिए लाया गया था। वहीं इसका खामियाजा उन ईमानदार और स्थापित कारोबारियों को भुगतना पड़ रहा है, जिनका टर्न ओवर बड़ा है लेकिन मार्जिन बेहद कम है। सरकार को चाहिए कि टर्न ओवर की इस सीमा को बढ़ाया जाए या कम मार्जिन वाले सेक्टरों को इसमें छूट दी जाए। चूरू, सरदारशहर, सुजानगढ़ और रतनगढ़ जैसे व्यापारिक केंद्रों के कारोबारियों का कहना है कि बाजार में नकदी की कमी है और व्यापार उधारी पर चलने के इस दौरान में ये नियम और भी भारी पड़ रहा है। जीएसटी नियमों के मुताबिक, यदि किसी कारोबारी का बी-टू-बी टर्न ओवर एक महीने में 50 लाख रुपए से अधिक है, तो वह अपने इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में मौजूद आईटीसी से अपनी कुल टैक्स देयता का 99% से ज्यादा भुगतान नहीं कर सकता। शेष 1% राशि का भुगतान नकद के जरिए ही करना होगा। चूरू जिला व्यापार संघ और स्थानीय कारोबारियों से बातचीत में यह बात सामने आई कि इस नियम से व्यापार का चक्र बिगड़ रहा है। कृषि जिंसों (चना, ग्वार, दाल) और सर्राफा बाजार में मुनाफा बहुत कम (1% से 2%) होता है। ऐसे में 1% टैक्स सीधे जेब से नकद में देना मुनाफे को लील रहा है। कारोबारियों का कहना है कि ग्रामीण अंचल में माल उधार जाता है और भुगतान 2 से 3 महीने बाद मिलता है। लेकिन सरकार को जीएसटी का नकद भुगतान हर महीने की 20 तारीख तक तुरंत चाहिए। इससे व्यापारियों को अपने घर या अन्य स्रोतों से नकदी का इंतजाम करना पड़ रहा है। व्यापारियों के जीएसटी पोर्टल पर पहले से ही लाखों-करोड़ों रुपए का आईटीसी जमा होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है, जो कि एक तरह से पूंजी के लॉक होने जैसा है। इस कारण जीएसटी के इस नियम से काफी परेशानी हो रही है। उल्लेखनीय है कि अब खरीफ फसलों की कटाई लगभग हो चुकी है। कृषि मंडियों में अनाज आना शुरू हो गया है। इसके साथ ही त्योहारी सीजन भी शुरू होने वाला है। इस समय ये परेशानी और बढ़ सकती है। 1 करोड़ मासिक टर्नओवर है तो 10 हजार रु. नकद जमा कराने होंगे : चूरू के किसी ग्वार गम या अनाज व्यापारी का मासिक टर्नओवर 1 करोड़ रुपए से ज्यादा है और महीने की कुल जीएसटी देयता 10 लाख रुपए बनती है। व्यापारी के पास पहले से ही करोड़ों रुपए का वैध इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) जमा है। बावजूद इसके नियम 86बी के तहत उसे 10 लाख का 1 प्रतिशत यानी कम से कम 10 हजार रुपए नकद जमा करवाने ही होंगे, भले ही उसका आईटीसी शून्य क्यों न हो जाए।