झालावाड़ के जिला आयुर्वेद अस्पताल में मंगलवार को पुष्य नक्षत्र के मौके पर स्वर्णप्राशन संस्कार हुआ। इसका मकसद बच्चों के स्वास्थ्य, शारीरिक विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना था। इस दौरान कुल 125 बच्चों को आयुर्वेदिक तरीके से स्वर्णप्राशन कराया गया। अस्पताल में 5 साल तक के बच्चों को स्वर्णप्राशन दिया गया। अभिभावकों ने भी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस मौके पर माता-पिता को आयुर्वेद में बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के पारंपरिक तरीकों के बारे में बताया गया। आयुर्वेद के डॉक्टरों और स्टाफ की देखरेख में बच्चों को तय प्रक्रिया के हिसाब से स्वर्णप्राशन दिया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर अभिभावकों में जागरूकता बढ़ाना था। साथ ही, आयुर्वेद की बाल स्वास्थ्य से जुड़ी पद्धतियों से आम लोगों को जोड़ना भी इसका उद्देश्य था। इस आयोजन के दौरान आयुर्वेद अस्पताल के प्रभारी डॉ. मृदुल किशोर टेलर, दूसरे डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और बाकी कर्मचारी मौजूद थे। अस्पताल के स्टाफ ने बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए। आयुर्वेद में पुष्य नक्षत्र को स्वर्णप्राशन के लिए बहुत खास माना जाता है। यही वजह है कि तय मौकों पर बच्चों को स्वर्णप्राशन कराया जाता है।