झालावाड़ जिले के खानपुर में शुक्रवार को निकाय चुनाव के दूसरे चरण का मतदान शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हुआ। सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक 25 वार्डों में 47,185 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। खानपुर में पहली बार नगर पालिका के रूप में शहरी सरकार चुनने के लिए मतदान हुआ, जिससे यह चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। भाजपा-कांग्रेस ने झोंकी पूरी ताकत दोनों प्रमुख दलों ने चुनाव में पूरी ताकत लगाई और अपने-अपने बोर्ड बनने का दावा किया। भाजपा की ओर से पूर्व संसदीय सचिव और पूर्व विधायक नरेंद्र नागर ने चुनाव की कमान संभाली, जबकि कांग्रेस की ओर से खानपुर विधायक सुरेश गुर्जर ने मोर्चा संभाला। मतदान खत्म होने के बाद दोनों नेताओं ने अपनी-अपनी पार्टी के पक्ष में माहौल होने का दावा किया। मतदान केंद्रों पर दिखा उत्साह सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं में उत्साह नजर आया। कई केंद्रों पर मतदाता कतारों में अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए। मुख्य बाजार क्षेत्र के मतदान केंद्रों के आसपास दिनभर विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रत्याशी और उनके समर्थक मतदान की स्थिति पर नजर बनाए रहे। खानपुर को नगर पालिका बनने के बाद पहला चुनाव खानपुर के इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि नगर पालिका बनने के बाद यहां पहली बार शहरी सरकार के लिए मतदान हुआ। इससे पहले खानपुर ग्राम पंचायत था। राज्य सरकार द्वारा खानपुर को नगर पालिका बनाए जाने के बाद यह पहला निकाय चुनाव है। ऐसे में चुनाव को लेकर मतदाताओं के साथ राजनीतिक दलों में भी खास उत्साह देखने को मिला। संवेदनशील केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा चारों निकायों में कुल 22 संवेदनशील मतदान केंद्र चिन्हित किए गए थे। इन केंद्रों पर विशेष पुलिस जाप्ते की व्यवस्था की गई। महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी रखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। द्वितीय चरण के मतदान के लिए 7 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस उपाधीक्षक सहित कुल 940 पुलिस अधिकारी, कर्मचारी, आरएसी और पुलिस जवानों की तैनाती की गई। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने मतदान दिवस पर कानून-व्यवस्था की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी। 14 सितंबर को खुलेगा जीत-हार का पत्ता खानपुर में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। मतदान के बाद दोनों दल अपने-अपने बोर्ड बनने का दावा कर रहे हैं, लेकिन असली तस्वीर 14 सितंबर को होने वाली मतगणना के बाद साफ होगी। इसी दिन तय होगा कि खानपुर की पहली शहरी सरकार की कमान भाजपा के हाथ आती है या कांग्रेस के।