कोटा का राष्ट्रीय दशहरा मेले की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। मुख्य इवेंट 19 अक्टूबर से शुरू होंगे। इस बार होने वाले कार्यक्रमों में भी कव्वाली और गजल के कार्यक्रम नहीं होने को लेकर कांग्रेस पार्षदों ने आपत्ति जताई है। कोटा के पूर्व उपमहापौर और वर्तमान वार्ड पार्षद सोनू कुरैशी ने इस निर्णय पर तीखा हमला बोला। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और नगर निगम प्रशासन पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। कोटा मेले में खुलेआम भेदभाव कुरैशी ने कहा कि जब से प्रदेश में भाजपा की सरकार आई है और नगर निगम द्वारा मेला आयोजित किया जा रहा है, तभी से कोटा मेले में खुलेआम भेदभाव शुरू कर दिया गया है। कव्वाली, मुशायरा और गजल संध्या जैसी कलाओं को किसी एक धर्म विशेष से जोड़कर देखना पूरी तरह से सोच की संकीर्णता है। उन्होंने कहा कि ये तमाम सांस्कृतिक विधाएं भारत के अपने इतिहास और कला-संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं, जिन्हें पूरे देश का हर नागरिक प्रेम से सुनता है। उर्दू कोई विदेशी भाषा नहीं सोनू ने कहा कि उर्दु कोई विदेश भाषा नहीं है। यह हिंदी और उर्दू के मेल से बनी हिंदुस्तानी भाषा है। देश की मिट्टी में पैदा हुई संस्कृति को किसी वर्ग या समुदाय तक सीमित करना पूरी तरह गलत है। कोटा का दशहरा मेला केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे हिंदुस्तान की शान है। देश के कोने-कोने से लाखों लोग यहाँ की सर्वसमावेशी संस्कृति और भाईचारे के रंग को देखने आते हैं। सैकड़ों सालों से सभी समाजों ने मिल-जुलकर इस मेले की भव्यता को बढ़ाया है। बंटवारे की राजनीति की जा रही उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में जिस तरह से चुनिंदा कार्यक्रमों को बंद करके बंटवारे की राजनीति की जा रही है, वह कोटा शहर की साख और भाईचारे पर कलंक लगाने का प्रयास है। पूर्व उपमहापौर ने स्पष्ट किया कि इस तरह की एकतरफा कार्रवाई का विरोध केवल बयानों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी नगर निगम बोर्ड की बैठक में इस मुद्दे को पूरी दमदारी के साथ उठाया गया था और आगामी बैठकों में भी इस भेदभाव के खिलाफ पुरज़ोर आवाज़ उठाई जाएगी।