कोटा दशहरा मेले में दुकानों की रसीद को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा विवाद और गतिरोध आखिरकार खत्म हो गया। रसीदें रोके जाने के विरोध में व्यापारियों के जोरदार हंगामे और व्यापार महासंघ के कड़े रूख के आगे नगर निगम प्रशासन को झुकना ही पड़ा। महापौर और निगम अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद बुधवार को मेले में सालों से दुकानें लगाने वाले पुराने दुकानदारों और झूला व्यवसायियों की रसीदें काटने की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है। रसीदें कटने की जानकारी मिलते ही दर्जनों व्यापारियों ने राहत की सांस ली है। चहेतों की रसीद काटने के आरोप लगे थे इससे पहले मंगलवार शाम को नगर निगम परिसर में उस समय स्थिति हंगामे की हो गई थी, जब 45 से 70 साल से मेले में दुकानें लगा रहीं दो बुजुर्ग विधवा महिलाओं समेत व्यापारी विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे। व्यापारियों ने आरोप लगाया था कि अधिकारी बंद कमरों में अपने चहेतों की रसीदें काट रहे हैं, जबकि 6 तारीख अंतिम तिथि होने के बावजूद 50-50 साल पुराने दुकानदारों को दर-दर भटकाया जा रहा है। झूला व्यापारी जाकिर और मेले में व्यापार करने वाले प्रकाश ने बताया कि 2025 के बोर्ड फैसले के अनुसार जिन हस्तांतरण मामलों को मंजूरी मिली थी, उन सभी की रसीदें बिना किसी भेदभाव के काटी जानी चाहिए थी, लेकिन अधिकारी कर्मचारी मामले को लटका रहे थे। कई व्यापारी बारां से आए थे महापौर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत अधिकारियों को तलब किया और पारदर्शी तरीके से सभी पात्र पुराने दुकानदारों की रसीदें काटने के सख्त निर्देश जारी किए। निर्देश मिलते ही नगर निगम के संबंधित कमरों में कर्मचारियों ने आवेदन जमा कर तुरंत रसीदें काटना शुरू कर दिया। कई व्यापारी बारां का मेला छोड़कर लेबर के भरोसे दुकानें छोड़ कोटा आए थे, जिन्हें रसीद मिलते ही वापस काम पर लौटने का रास्ता साफ हो गया है।