श्री जैन तेरापंथी मानव हितकारी संघ राणावास में पर्यूषण पर्व के चतुर्थ दिवस पर वाणी संयम पर कार्यक्रम हुआ। SJT कॉलेज की छात्रा कृष्णा साहू ने कहा कि वाणी रिश्ते मजबूत करती है। वाणी से अच्छे रिश्ते बनते हैं। फार्मेसी कॉलेज के व्याख्याता श्रवण कुमार वैष्णव ने कहा कि बोलने से पहले विचार करना चाहिए। यह भी सोचना चाहिए कि क्या बोल रहा हूं। मेरी वाणी का सामने वाले पर क्या प्रभाव पड़ेगा। सुमति स्कूल की अध्यापक खुशबू कंवर ने कहा कि वाणी से मनुष्य के गुण और व्यवहार का आंकलन होता है। सुमति विद्यालय की छात्रा अलीशा ने कहा कि जुबान से निकला शब्द वापस नहीं आता। इसलिए बोलने से पहले शब्दों को तोलना चाहिए। व्याख्याता अभिलाषा अरोड़ा ने कहा कि पर्युषण पर्व पर हम जब बोलें तो सामने वाले को प्रसन्नता होनी चाहिए। फार्मेसी कॉलेज के छात्र दलपत ने कहा कि सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग करें। ऐसे शब्द न बोलें जिससे किसी को ठेस पहुंचे। व्याख्याता ओमसिंह ने कहा कि व्यक्ति को मर्यादित भाषा का प्रयोग करना चाहिए। वाणी का संयम बहुत जरूरी है। कार्यक्रम में संस्था व्यवस्थापक नेपाल सिंह ने कहा कि पानी जब मर्यादा तोड़े तब विनाश होता है।