जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने के लिए मंगलवार को जिला कलेक्टर सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक हुई​ जिसमें स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और अभियानों की प्रगति की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को आमजन तक समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने जिले के चिकित्सा संस्थानों में चल रहे भवन निर्माण कार्यों की नियमित जांच करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि संबंधित बीसीएमओ और चिकित्सा अधिकारी प्रभारी निर्माण कार्यों का निरीक्षण करें। निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाए। 10 अक्टूबर को जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों में होने वाली पीटीएम के दौरान एचपीवी टीकाकरण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। वहीं एनीमिया मुक्त भारत अभियान की प्रगति आगामी बैठक तक 80 प्रतिशत से अधिक करने के निर्देश दिए गए। हाई रिस्क गांवों में शिविर लगाकर होगी टीबी की जांच: 100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले के हाई रिस्क गांवों में एक्स-रे मशीनों के जरिए जांच शिविर लगाए जा रहे हैं। 14 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी की चेस्ट एक्स-रे स्क्रीनिंग की जा रही है। संभावित टीबी मरीजों की जांच कर पॉजिटिव पाए जाने वाले मरीजों को डिफरेंशिएटेड टीबी केयर के तहत उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। मौसमी बीमारियों पर नियंत्रण के लिए अधिकारियों को घर-घर सर्वे, एंटी लार्वा गतिविधियां और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। प्रत्येक बुखार रोगी की ब्लड स्लाइड जांच सुनिश्चित करने के साथ गांव, ढाणी, मोहल्ले और वार्ड स्तर पर सक्रिय निगरानी बढ़ाने को कहा गया। बैठक में जेएसवाई, एएनसी, संस्थागत प्रसव, टीकाकरण, एचबीएनसी और परिवार कल्याण कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को एमआर-2 टीकाकरण का लक्ष्य 95 प्रतिशत से अधिक करने तथा एनक्यूएएस के निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए।