2021 में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पैर में फ्रैक्चर का दावा करने वाली ममता बनर्जी ने सोमवार को 3 अस्पतालों को कानूनी नोटिस भेजा है। उन्होंने पूछा है कि उनके इलाज से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी तक कैसे पहुंचे। यह मामला तब सामने आया है, जब शुभेंदु ने 3 अक्टूबर को आरोप लगाया कि ममता ने 2021 के चुनाव के दौरान अपनी चोट को लेकर गलत दावे किए थे। उन्होंने कहा कि वे इस मामले की जांच कराएंगे। दरअसल, 10 मार्च 2021 को नंदीग्राम में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ममता घायल हुई थीं। उन्होंने आरोप लगाया था कि 4-5 लोगों ने उन्हें धक्का दिया, जिससे कार का दरवाजा उनके पैर से टकराया और उनका पैर फैक्चर हो गया था। इसके बाद उनके पैर में प्लास्टर लगाया गया और उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर चुनाव प्रचार किया था। ममता ने नोटिस में पूछा- मेरी सहमति क्यों नहीं ली गई यह नोटिस 5 अक्टूबर को SSKM अस्पताल के निदेशक डॉ. मणिमय बंद्योपाध्याय, बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और वाइस प्रिंसिपल डॉ. पिजुश कुमार रॉय को और बांगुर इंस्टीट्यूट के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अतनु विश्वास को भेजा गया है। ममता ने पूछा है कि मेडिकल रिकॉर्ड जारी करने से पहले उनकी सहमति ली गई थी या नहीं। क्या दस्तावेज जारी करने के लिए किसी अदालत ने आदेश दिया था। रिकॉर्ड का इस्तेमाल किसलिए हुआ। किन परिस्थितियों में इसे दिया गया। साथ ही, यह भी बताने को कहा गया है कि सार्वजनिक किए गए दस्तावेज मूल मेडिकल रिकॉर्ड थे या नहीं। इसकी एक कॉपी स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को भी भेजी गई है। सीएम अधिकारी ने कहा- 9 अक्टूबर को खुलासा करेंगे अधिकारी ने कहा, “2021 में मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि उनका अपमान किया गया और उनका पैर टूट गया। हालांकि, उस समय बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज की रिपोर्ट में कोई फ्रैक्चर नहीं बताया गया था।” उन्होंने कहा, “CID इस मामले की जांच कर रही है। हम झूठे प्रचार की नई जांच कराएंगे। इसकी जानकारी 9 अक्टूबर के बाद दी जाएगी।” 36 साल में सार्वजनिक सभा-प्रदर्शनों में 9 बार चोटिल हो चुकीं ममता ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें… शुभेंदु बोले- बंगाल से TMC का नाम-ओ-निशान मिट गया: नंदीग्राम सीट पर ममता को हराया था पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 2 अक्टूबर को नंदीग्राम में BJP प्रत्याशी के लिए प्रचार करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि राज्य से तृणमूल कांग्रेस का नाम और निशान मिटा दिया गया है। अधिकारी ने बताया कि चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए हैं। किसी का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, “मुख्य चोर भी जेल जाएगा।” पढ़ें पूरी खबर…