जयपुर की ऐतिहासिक जल-विरासत तालकटोरा पर करीब ₹12.90 करोड़ खर्च कर जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन आज यहां फव्वारे बंद हैं, लाइटिंग ठप है, पैनल चोरी हो चुके हैं और गंदा पानी पहुंचने की शिकायत है। पांच साल पहले लगाए गए नाव नुमा फव्वारे जर्जर होकर पानी में डूबे पड़े हैं और चारों ओर मलबा-कचरा जमा है। नगर निगम के नए मेयर सुनील कोठारी ने 28 सितंबर को अपना शुरुआती निरीक्षण तालकटोरा से किया था। उन्होंने एक सप्ताह में सफाई-सौंदर्यीकरण और व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए, लेकिन इसके बाद निगम अफसर मौके पर हालात देखने तक नहीं पहुंचे। भास्कर ने मौके पर पड़ताल की तो सामने आया कि पिछले 20 साल में तालकटोरा के लिए योजनाएं और एजेंसियां बदलती रहीं, करोड़ों रुपए खर्च हुए, लेकिन रखरखाव की व्यवस्था नहीं बन सकी। पहले नगर निगम का ₹4.93 करोड़ का प्रोजेक्ट वर्कऑर्डर के बावजूद शुरू नहीं हुआ। बाद में स्मार्ट सिटी ने संरक्षण, पुनरुद्धार और जीर्णोद्धार पर करीब ₹12.90 करोड़ खर्च किए। इसमें करीब ₹1.31 करोड़ सीवर और नाला डायवर्जन पर लगाए गए थे। इसके बावजूद गंदे पानी की समस्या फिर सामने है। जिस सीवर को रोकने पर ₹1.31 करोड़ लगे, वही पानी फिर तालकटोरा में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सीवर और नाला डायवर्जन के लिए करीब ₹1.31 करोड़ का अलग काम किया गया था। अब गोविंददेवजी मंदिर और जयनिवास गार्डन क्षेत्र की क्षतिग्रस्त सीवर लाइन से गंदा पानी तालकटोरा तक पहुंचने की शिकायत है। सवाल है कि जिस समस्या को खत्म करने पर पैसा खर्च हुआ, वह दोबारा कैसे लौट आई? कभी जल-व्यवस्था का हिस्सा था, आज गंदे पानी की शिकायत नाहरगढ़ से यहां तक पानी पहुंचाने वाली पुरानी संरचनाओं के अवशेष भी मिलते हैं। कभी शहर तक साफ पानी पहुंचाने वाली व्यवस्था का हिस्सा रही आज सीवर पहुंचना रखरखाव की स्थिति बताता है। तीन साल में सिर्फ 3 बार चला लाइटिंग शो, पैनल तक चोरी तालकटोरा को शाम के समय पर्यटक आकर्षण बनाने के लिए विशेष लाइटिंग लगाई गई थी। स्थानीय निवासी मनोज शर्मा के मुताबिक पिछले 3 साल में लाइव लाइटिंग शो महज 3बार चला। बोटिंग के प्लान बने, स्थायी मॉडल नहीं; 2023 में जयपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने PPP मॉडल पर बोटिंग, मनोरंजन गतिविधियों और रखरखाव के लिए प्रक्रिया शुरू की। निजी संचालक को संचालन और पर्यटक सुविधाओं की जिम्मेदारी देने की योजना थी, लेकिन यह मॉडल भी स्थायी रूप से जमीन पर नहीं टिक सका। अब मेयर के सामने असली परीक्षा; मेयर सुनील कोठारी ने 28 सितंबर को निरीक्षण के दौरान विशेष सफाई-सौंदर्यीकरण, मौजूदा व्यवस्थाओं की समीक्षा और नाव संचालन की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए थे। अब चुनौती यह पता लगाने की भी है कि ₹12.90 करोड़ का काम पूरा होने के बाद रखरखाव किसके जिम्मे था, उस पर कितनी राशि खर्च हुई, सीवर फिर तालकटोरा तक कैसे पहुंचा।