आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आरक्षण के नियमों में जटिलताओं को सरल करने और इसके सुधार की मांग को लेकर यात्रा पर निकले शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी का काफिला सोमवार शाम बीकानेर पहुंचा। भाटी को मुद्दे को लेकर व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। विधायक का काफिला करमीसर फांटे से होते हुए पूगल फांटा, नयाशहर, चौखूंटी पुलिया, हेड पोस्ट ऑफिस, जूनागढ़, रानी बाजार, जैन कॉलेज और पुराना बस स्टैंड समेत शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा। इस दौरान पूरे रास्ते में जगह-जगह स्वागत मंच सजाए गए थे। यात्रा के बीकानेर पहुंचने पर जूनागढ़ के सामने एक विशाल सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान उमड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि वह दौर बीत चुका है जब हम तलवारों से शीश उतारकर रक्षा करते थे, अब लोकतांत्रिक तरीके से “सिर गिनाने” यानी अपनी ताकत और संख्या दिखाने का समय है। भाटी ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई न तो रविंद्र सिंह की है और न ही किसी एक विशेष वर्ग की। यह उन तमाम अनारक्षित गरीबों की लड़ाई है जिन्हें उनका वाजिब हक नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा, “इस वक्त न तो कोई चुनाव चल रहा है और न ही मैं वोट मांगने आया हूं। यह पूरी तरह राजनीति से दूर एक वैचारिक आंदोलन है। “उन्होंने जनता को चावल देकर न्यौता देते हुए आह्वान किया कि जब दिल्ली तक अपनी आवाज पहुंचाने और संख्या दिखाने की बारी आए, तो इतनी संख्या में उपस्थित होना कि वहां बैठे हुक्मरान गरीब वर्ग के हितों की रक्षा के लिए मजबूर हो जाएं। राजनीतिक दलों पर टिप्पणी से बचते दिखे, धर्मेंद्र सिंह राठौड़ का किया धन्यवाद : भाटी ने अपने संबोधन में किसी भी राजनीतिक पार्टी पर सीधे सवाल उठाने या टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने इस आंदोलन से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त किया और विशेष रूप से धर्मेंद्र सिंह राठौड़ का भी साधुवाद किया जो इस मुहिम में जुटे हुए हैं। उन्होंने ऐलान किया कि जल्द ही जयपुर से लेकर दिल्ली तक इस मांग को लेकर शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें बीकानेर को अपना पूरा रुतबा और ताकत दिखानी होगी। भाटी के संबोधन के दौरान पूरा पंडाल “भाटी... भाटी...” के नारों से गूंज उठा। इस ऐतिहासिक जनसभा और यात्रा में विभिन्न वर्गों और समाजों के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिससे साफ जाहिर होता है कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण के सरलीकरण की मांग को लेकर युवाओं और आमजन में कितना भारी समर्थन है। वो कौन सी मांगें जिनके लिए सड़कों पर उतरे भाटी भूमि एवं संपत्ति संबंधी शर्तों की समीक्षा: केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार 5 एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि, और शहरी/ग्रामीण क्षेत्रों में तय आकार से बड़ा मकान होने पर ईडब्ल्यूएस का लाभ नहीं मिलता। उनकी मांग है कि इस विसंगति को दूर कर पात्रता नियमों को व्यावहारिक बनाया जाए। • केंद्र और राज्य के नियमों में एकरूपता: राजस्थान सरकार ने राज्य स्तर की भर्तियों में संपत्ति (जमीन/मकान) संबंधी शर्त को हटा दिया है और केवल आय (8 लाख रुपये सालाना) को आधार रखा है। मांग है कि राज्य के इस सरल नियम को केंद्र सरकार की भर्तियों और केंद्रीय संस्थानों में भी लागू किया जाए । प्रमाण-पत्र की वैधता बढ़ाना: वर्तमान में ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र को बार-बार नवीनीकृत कराना पड़ता है। ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र की वैधता अवधि को बढ़ाकर 3 से 5 वर्ष किया जाए। विवाहित बेटियों की आय की गणना का सरलीकरण: शादीशुदा बेटियों के मामले में आय की गणना पीहर पक्ष (पिता) और ससुराल पक्ष (पति) दोनों को जोड़कर की जाती है, जिससे कई विसंगतियां पैदा होती हैं। मांग है कि इसे स्पष्ट और सरल किया जाए। • उम्र और फीस में छूट: अन्य आरक्षित वर्गों की तर्ज पर ईडब्ल्यूएस वर्ग के अभ्यर्थियों को भी सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं में आयु सीमा और आवेदन फीस में छूट दी जाए। • बाहरी अभ्यर्थियों पर नियंत्रण: राजस्थान की सरकारी भर्तियों में अन्य राज्यों के सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को ईडब्ल्यूएस का लाभ मिलने पर रोक लगाने की मांग की है। •निकायों में प्रतिनिधित्व: सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों में भी उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिया जाए।