राज्य सरकार के खेल दावों के बीच उदयपुर में खेल प्रशिक्षण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद द्वारा नए संविदा प्रशिक्षक तैनात न करने से सात महीनों से शहर के 500 खिलाड़ियों का नियमित अभ्यास ठप है। जिले में कार्यरत 32 संविदा कोचों का अनुबंध मार्च में ही समाप्त हो गया था। अब 7 अक्टूबर को पुनर्नियुक्त सेवानिवृत्त प्रशिक्षकों का कार्यकाल भी खत्म होने जा रहा है, जिससे खेल मैदानों में खिलाड़ियों को सिखाने के लिए प्रशिक्षक नहीं रहेगा। प्रशिक्षण तंत्र टूटने की मुख्य वजह प्रशासनिक लापरवाही है। संविदा और पुनर्नियुक्त प्रशिक्षकों को 5 से 6 महीने तक मानदेय (38 से 40 हजार रुपए प्रतिमाह) का भुगतान नहीं किया गया। बकाया न मिलने से परेशान कई योग्य कोचों ने खेल विभाग छोड़कर निजी स्कूलों का रुख कर लिया। वहीं दूसरी ओर, वर्ष 2012-13 के बाद से खेल विभाग में नियमित प्रशिक्षकों की स्थायी भर्ती ही नहीं हुई है। फ्री कोचिंग बंद, अभ्यास के लिए 2000 रु. दे रहे सरकारी ढर्रे की सजा उन खिलाड़ियों को भुगतनी पड़ रही है, जो राज्य और राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों की तैयारी कर रहे थे। नियमित कोच न होने से खिलाड़ियों को अब महाराणा प्रताप खेलगांव में ‘पे एंड प्ले’ योजना का सहारा लेना पड़ रहा है। जिस सरकारी परिसर में खिलाड़ियों को मुफ्त प्रशिक्षण मिलना चाहिए था, वहां अब शूटिंग, एथलेटिक्स, हॉकी, स्विमिंग, बास्केटबॉल और बॉक्सिंग जैसे 9 खेलों के लिए 500 से 2000 रुपए प्रतिमाह शुल्क वसूला जा रहा है। ऐसे खराब हुआ खेल 500 से अधिक नियमित प्रशिक्षणार्थी। 32 प्रशिक्षकों का अनुबंध मार्च से समाप्त। 07 अक्टू. से पुनर्नियुक्त सेवानिवृत्त कोचों की सेवाएं समाप्त हो जाएंगी। 5-6 माह से कोचों और स्टाफ का भुगतान बकाया। 2012-13 के बाद से विभाग में कोई नियमित नियुक्ति नहीं। नई तैनाती के लिए पत्राचार जारी है: खेल अधिकारी मार्च में संविदा प्रशिक्षकों का कार्यकाल पूरा हो गया था। क्रीड़ा परिषद से नए प्रशिक्षक तैनात करने के लिए पत्राचार चल रहा है। फिलहाल उपलब्ध संसाधनों से व्यवस्था चलाई जा रही है। -डॉ. महेश पालीवाल, जिला खेल अधिकारी, उदयपुर