निगम चुनाव में पार्टियों ने टिकट भले ही जातीय समीकरण, स्थानीय पकड़ और जीत की संभावना देखकर बांटे हों, लेकिन प्रत्याशियों की ‘चुनावी कुंडली’ एक अलग ही तस्वीर दिखा रही है। राशि के हिसाब से देखें तो भाजपा का सबसे बड़ा दांव कुंभ राशि पर है, जबकि कांग्रेस के टिकट पर सबसे ज्यादा ‘सिंह’ चुनावी मैदान में हैं। भाजपा के 149 प्रत्याशियों में 36 कुंभ राशि के हैं। सिंह राशि वाले 18 प्रत्याशी दूसरे नंबर पर हैं। कांग्रेस के 26 सिंह राशि के उम्मीदवार हैं और 25 कुंभ राशि वाले। दोनों पार्टियों की बात करें तो कुंभ राशि पहले नंबर पर है। इस राशि वाले सर्वाधिक 61 प्रत्याशी हैं। दूसरे नंबर पर सिंह राशि है, जिसके 44 प्रत्याशी हैं। दिलचस्प यह है कि 298 प्रत्याशियों में 105 यानी 35% से ज्यादा प्रत्याशी कुंभ और सिंह राशि के हैं। ज्योतिष में कुंभ को ‘नई सोच’ तो सिंह ‘नेतृत्व’ का प्रतीक मानते हैं ज्योतिषीय मान्यताओं में हर राशि को अलग-अलग स्वभाव और गुणों से जोड़ा जाता है। कुंभ को नवीन सोच और बदलाव, जबकि सिंह को नेतृत्व और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है। मेष को साहस-नेतृत्व, वृषभ को स्थिरता, मिथुन को संवाद-कौशल, कर्क को संवेदनशीलता, कन्या को विश्लेषण, तुला को संतुलन, वृश्चिक को दृढ़ता, धनु को आशावाद, मकर को अनुशासन और मीन को संवेदनशीलता से जोड़ा जाता है। हालांकि पार्टियों ने टिकट स्थानीय समीकरण, प्रत्याशी की राजनीतिक पकड़ और जीत की संभावना के आधार पर दिए हैं। चुनाव में सूर्य और राजयोग की भूमिका मानी जाती है सीताबाड़ी, टोंक रोड निवासी ज्योतिषाचार्य पं. चंद्रमोहन दाधीच के अनुसार ज्योतिषीय मान्यताओं में सत्ता, पद और चुनावी सफलता के लिए जन्म कुंडली में ग्रहों के अनुकूल योग को महत्वपूर्ण माना जाता है। राजनीति और सरकार का कारक सूर्य माना गया है। दाधीच के अनुसार वर्तमान में सूर्य सिंह राशि में भ्रमण कर रहे हैं। जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति के साथ महादशा-अंतर्दशा अनुकूल हो तो इसे सफलता के लिए शुभ माना जाता है।