पाली जिले के रोहट क्षेत्र के पांचपदरिया गांव के ग्रामीण मंगलवार को विधायक भीमराज भाटी के नेतृत्व में पाली कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी को ज्ञापन सौंपकर गांव में पेयजल संकट और कृषि भूमि की गिरदावरी में कथित अनियमितताओं की शिकायत की। ग्रामीणों ने दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच करवाकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की। पानी की आपूर्ति प्रभावित होने का आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि विधायक कोटे से पांचपदरिया गांव के लिए बिछाई गई पेयजल पाइपलाइन से बीच में सिराणा और रेवड़ा खुर्द गांवों में भी जलापूर्ति जोड़ दी गई है। उनका कहना है कि इसके कारण पांचपदरिया तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है और ग्रामीणों को रुपए खर्च कर टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, पहले वायद स्थित टंकी से पांचपदरिया तक अलग पाइपलाइन के जरिए सीधे गांव में पेयजल की आपूर्ति की जाती थी। यह पाइपलाइन विशेष रूप से पांचपदरिया के लिए डाली गई थी। बाद में बीच में पड़ने वाले सिराणा और रेवड़ा खुर्द गांवों में जलापूर्ति जोड़ दिए जाने से पांचपदरिया की पानी की आपूर्ति प्रभावित हो गई। ग्रामीणों ने मांग की कि यदि सिराणा और रेवड़ा खुर्द गांवों में पेयजल उपलब्ध कराना है तो उनके लिए अलग पाइपलाइन की व्यवस्था की जाए। साथ ही पांचपदरिया की पाइपलाइन से किए गए कनेक्शन हटाए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पेयजल का अन्य पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। जल जीवन मिशन के कनेक्शनों पर भी सवाल ग्रामीणों ने जल जीवन मिशन के तहत गांव में डाली गई पाइपलाइन और जारी किए गए कनेक्शनों को लेकर भी शिकायत की। उनका आरोप है कि कई क्षेत्रों में अभी तक कनेक्शन पूरे नहीं किए गए हैं और कुछ स्थानों पर नल भी नहीं लगाए गए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके पर जांच करवाकर स्थिति स्पष्ट करने और गांव की पेयजल व्यवस्था को सुचारू करने की मांग की। गिरदावरी में अनियमितता का भी आरोप ग्रामीणों ने कृषि भूमि की गिरदावरी को लेकर भी शिकायत की। उनके अनुसार, इस वर्ष अकाल की स्थिति के कारण किसानों की फसल खराब हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्धारित समय पर पटवारी ने मौके पर गिरदावरी नहीं की और अब खेतों में मवेशियों के चारा चरने के बाद गिरदावरी की जा रही है। फसल खराबे का मुआवजा मिलने में हो सकती है परेशानी ग्रामीणों का आरोप है कि कई खेतों में फसल खराब होने के बावजूद रिकॉर्ड में ‘पड़त’ का इंद्राज किया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे किसानों को फसल खराबे का मुआवजा मिलने में परेशानी हो सकती है। ग्रामीणों ने मांग की कि गिरदावरी वास्तविक स्थिति के आधार पर और किसानों की मौजूदगी में करवाई जाए, ताकि फसल खराबे का सही आकलन हो सके और पात्र किसानों को उनके हक का लाभ मिल सके ग्रामीणों ने प्रशासन से दोनों मामलों की तत्काल निष्पक्ष जांच करवाने, पांचपदरिया में पेयजल आपूर्ति सुचारू करने और फसल खराबे की वास्तविक गिरदावरी करवाने की मांग की।