बच्चे ने नया वॉट्सऐप ग्रुप जॉइन किया, ग्रुप बनाया या उसकी प्रोफाइल में बदलाव किया तो अब माता-पिता को इसकी जानकारी मिल सकती है। वॉट्सऐप ने 13 से 17 साल के किशोरों के लिए पैरेंटल कंट्रोल शुरू किया है। इसमें माता-पिता बच्चे के अकाउंट को अपने अकाउंट से लिंक कर उसकी प्राइवेसी और कुछ फीचर्स पर नियंत्रण रख सकेंगे। यह सुविधा वैकल्पिक है और फिलहाल चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जा रही है। सबसे बड़ा बदलाव ग्रुप को लेकर है। पैरेंटल कंट्रोल ऑन होने पर बच्चे के नया ग्रुप बनाने या किसी ग्रुप में शामिल होने पर माता-पिता को नोटिफिकेशन मिल सकता है। ग्रुप में सदस्यों की संख्या में बड़ा बदलाव होने पर भी एक्टिविटी की जानकारी मिल सकती है। माता-पिता यह भी तय कर सकेंगे कि ऐसी कौन-कौन सी गतिविधियों के अलर्ट उन्हें चाहिए। चैनल पर भी चलेगी माता-पिता की मर्जी। बच्चे को सभी चैनल देखने की अनुमति दी जा सकती है, सिर्फ माता-पिता की मंजूरी वाले चैनल दिखाए जा सकते हैं या चैनल पूरी तरह बंद किए जा सकते हैं। माता-पिता बच्चे को नया चैनल बनाने से भी रोक सकेंगे। स्टेटस की पहुंच भी तय होगी। बच्चा किन लोगों का स्टेटस देख सकता है और उसका स्टेटस कौन देख सकता है, इसकी सेटिंग माता-पिता बदल सकेंगे। विकल्प में सभी कॉन्टैक्ट, चुनिंदा कॉन्टैक्ट या किसी को भी स्टेटस न दिखाने जैसी सेटिंग शामिल है। प्राइवेसी सेटिंग बदलना भी अब आसान नहीं होगा। माता-पिता तय कर सकेंगे कि बच्चे की प्रोफाइल संबंधी जानकारी कौन देख सकता है और कौन उसे कॉन्टैक्ट कर सकता है। अगर बच्चा किसी सेटिंग को कम प्रतिबंधित करना चाहता है तो कुछ बदलावों के लिए पैरेंट पिन की मंजूरी जरूरी होगी। चैट नहीं पढ़ सकेंगे माता-पिता: इस फीचर को लेकर सबसे अहम बात यह है कि पैरेंटल कंट्रोल का मतलब बच्चे की निजी चैट पढ़ना नहीं है। वॉट्सऐप के मुताबिक एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के कारण बच्चे के निजी मैसेज और कॉल माता-पिता भी नहीं पढ़ या सुन सकेंगे। नए फीचर का सबसे अहम पहलू यही है कि माता-पिता को बच्चे की गतिविधि का संकेत मिलेगा, लेकिन निजी बातचीत की सामग्री नहीं। यानी वॉट्सऐप ने सुरक्षा और किशोर की प्राइवेसी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। बच्चों के लिए यह नियंत्रण तभी उपयोगी होगा, जब अभिभावक पिन और सेटिंग के साथ उन्हें सुरक्षित इंटरनेट इस्तेमाल के बारे में भी समझाएं।