भास्कर न्यूज| भरतपुर शहर में किराये के मकान में रहने वाले लाखों लोगों के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग व्यवस्था लागू कर रही है। इसके जरिए कम आय वाले परिवारों, प्रवासी मजदूरों, नौकरीपेशा लोगों और अन्य जरूरतमंदों को शहरों में कम किराये पर रहने के लिए मकान उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को सुरक्षित, साफ-सुथरा और बुनियादी सुविधाओं से युक्त आवास उपलब्ध कराना है, जो अपना घर खरीदने की स्थिति में नहीं हैं। शहरों में बढ़ती जमीन और मकानों की कीमतों के बीच रोजगार और पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में रहने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती किफायती किराये का घर ढूंढना होती है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था इस समस्या को कम करने की दिशा में काम करेगी। इस संबंध में केंद्र सरकार ने प्रशासन से शहर में रहने वाले प्रवासी मजदूर, नौकरीपेशा और कम आय वाले परिवारों और किरायेदारों की रिपोर्ट मांगी है।इस व्यवस्था से किरायेदारों को राहत मिलेगी और शहरों में सस्ता आवास उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलेगी। नए किराये के आवास बनेंगे:- निजी व सरकारी संस्थाएं नए अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग परिसर तैयार करेंगी। इन मकानों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी संबंधित संस्था की होगी। इससे शहरों में जरूरत के अनुसार नए किफायती किराये के मकानों की संख्या बढ़ाई जाएगी। खाली सरकारी मकानों का होगा उपयोग:- सरकार के पास पहले से बने लेकिन खाली पड़े सरकारी आवासों को किराये के मकानों में बदला जाएगा। इनका संचालन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) या सरकारी एजेंसियों के माध्यम से किया जा सकेगा। इससे खाली पड़े सरकारी मकानों का उपयोग जरूरतमंद लोगों के लिए किया जाएगा। मकान के साथ मिलेंगी जरूरी सुविधाएं:- योजना के तहत विकसित होने वाले आवासीय परिसरों में केवल रहने की सुविधा ही नहीं होगी, बल्कि पानी, सीवर या सेप्टेज व्यवस्था, साफ-सफाई, आंतरिक सड़क, सामुदायिक केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र और बच्चों के लिए क्रेच जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। एआरएच व्यवस्था का लाभ मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लोगों को मिलेगा। इसके अलावा शहरों में रोजगार के लिए आने वाले प्रवासी श्रमिक, बेघर और जरूरतमंद परिवार, औद्योगिक मजदूर, निर्माण श्रमिक, कामकाजी महिलाएं, स्ट्रीट वेंडर, रिक्शा चालक, घरेलू कामगार, छोटे सर्विस प्रोवाइडर और संविदा कर्मचारी भी इस योजना के दायरे में शामिल हो सकते हैं।