रायपुर के जैन स्थानक में पर्यूषण पर्व पर धर्माराधना और प्रवचन हुए। साध्वी प्रफुल्लप्रभा और साध्वी वैराग्यपूर्णा की मौजूदगी में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान साध्वी ने पर्यूषण पर्व के 5 प्रमुख कर्तव्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व आत्मनिरीक्षण कर जीवन में बदलाव लाने का मौका है। साध्वी ने पहले कर्तव्य के रूप में अहिंसा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में अहिंसा सबसे ऊपर है। व्यक्ति को न खुद हिंसा करनी चाहिए और न ही किसी और से करवानी चाहिए। जैन धर्म सिर्फ इंसानों के लिए नहीं, बल्कि पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों समेत हर जीव के प्रति प्रेम और दया रखने की सीख देता है। साध्वी ने बताया कि पर्यूषण के आठ दिनों में हरी सब्जियों, फल और हिंसा से बने सौंदर्य प्रसाधनों से परहेज कर अहिंसा की भावना को मजबूत किया जा सकता है। दूसरे कर्तव्य के तौर पर साध्वी ने हर जीव के प्रति प्रेम और वात्सल्य रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि मन में दया और दोस्ती का भाव रखने से इंसान के व्यवहार में अच्छे बदलाव आते हैं।