दादा को नशे का सामान खरीदते देख मजदूरी करने वाला विशनाराम तीन राज्यों का बड़ा तस्कर तस्कर बन गया। पुलिस ने 1 लाख रुपए का इनाम घोषित किया। ANTF टीम ने मध्यप्रदेश से तस्कर को गिरफ्तार किया है। 12 सालों में राजस्थान के अलग-अलग पुलिस थानों में डेढ़ दर्जन मामले दर्ज हैं। तस्कर एएनटीएफ से बचने के लिए एमपी में फर्नीचर का बिजनेस शुरू किया था। टीम ने कारीगरों को ट्रैक कर उसके ठिकानों पर दबिश दी। आईजी विकास कुमार ने बताया- आरोपी ने पुलिस बचने के लिए जोधपुर में किराए का मकान लिया। समय-समय पर रिश्तेदारों के यहां ठिकाने बदलकर फरारी काटता रहा। लगातार एएनटीएफ के लगातार दबिश की वजह से उसने राजस्थान छोड़कर मध्यप्रदेश फरारी काटने पहुंचा। उसके एक प्रतिद्वंदी से जब उसकी जानकारी जुटाई गई तो तस्कर पकड़ा गया। पहचान बदलकर रहा था मध्यप्रदेश में आईजी विकास कुमार ने बताया- आरोपी को जब यह अंदाजा हो गया तो राजस्थान की एएनटीएफ उसका पीछा नही छोड़ेगी, तो वह राजस्थान छोड़कर मध्यप्रदेश पहुंच गया। वहां अपनी पहचान छिपाकर फरारी काटने लगा। पुलिस ने बचने के लिए आरोपी ने अपना ठिकाना और काम दोनों बदल दिया। पार्टी करते हुए पकड़ा टीम ने विशनाराम के एक प्रतिद्वंदी को साथ मिलाया। इसी दौरान विशनाराम ने जोधपुर से फर्नीचर के कारीगर भी बुलाए। पुलिस इन कारीगरों की जानकारी जुटाकर उन पर निगरानी रखी। ट्रैक करते हुए टीम मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के पिपलियामंडी थाने के उमरिया गांव पहुंची। एएनटीएफ की टीम जब आरोपी के ठिकाने तक पहुंची। आरोपी विश्नाराम अपने तस्कर दोस्त के चाचा के मकान पर अपने दोस्त व कारीगरों के साथ मिलकर पार्टी कर रहा था। इस टीम ने घेराबंदी कर आरोपी विश्नाराम पुत्र मदाराम निवासी कुड़ला पुलिस थाना रीको बाड़मेर को दबोचा। दादा को नशे में देख तस्करी में उतरा आरोपी विश्नाराम 12वीं क्लास में पढ़ता था। पाइपलाइन कंपनी में ड्राइविंग का काम करने लगा। इस काम में मोटी कमाई नहीं के कारण सपने और शौक पूरे नहीं कर पा रहा था। आरोपी विश्नाराम ने अपने दादा की नशे की दुनिया में डूबा देखकर दादा काफी पैसे खर्च कर नशे का थोड़ा सा सामान ही लाते थे। दादा का महंगा नशा देखकर उसने सोचा की स्वयं की इस धंधे में उतर जाउं और मोटी कमाई करूं। मजदूरी के दौरान हुआ तस्कर से संपर्क आरोपी का मजदूरी के दोरान उसका संपर्क एक तस्कर से हुआ। मध्यप्रदेश से डोडा-पोस्त खरीदकर मारवाड़ में उच्चे दाम पर सप्लाई करता था। आरोपी खलासी के रूप उसके साथ जाने लगा उसे अच्छी कमाई होनी लगी। 12 साल में राजस्थान में डेढ़ दर्जन से अधिक मामले दर्ज